काली कमाई करने वाले कई विभागों के अफसर और बाबुओं की बिल्डरों से भी तगड़ी सेटिंग है। गलत तरीकों से कमाई गई रकम का बड़ा हिस्सा बिल्डरों के जरिए बहुमंजिला अपार्टमेंट के निर्माण में भी लगा रखा है। इसमें एडीए के कई पूर्व अफसरों के साथ अभियंता, कुछ बाबू समेत लोक निर्माण विभाग, आरटीओ कार्यालय, वाणिज्य कर विभाग, जिला प्रशासन के अफसर और बाबू भी लिप्त हैं। इन सरकारी मुलाजिमों ने काली कमाई के बाद उसे खपाने और खुद को बचाने के लिए हर जतन किए हैं। लेकिन आने वाले समय में यदि मोदी सरकार बेनामी संपत्ति के खिलाफ कोई कदम उठाती है तो ऐसे लोगों की मुसीबत बढ़ने जा रही है।
कई सरकारी कार्यालयों के अफसर और बाबुओं ने बेहद शातिराना तरीके से करोड़ों में काली कमाई की है। पिछले चार-पांच सालों में शहर के विभिन्न इलाकों में तेजी से बने निजी बहुमंजिला अपार्टमेट्स में ऐसे लोगों ने काली कमाई का बड़ा हिस्सा लगा रखा है। एडीए के कई अभियंता ऐसे हैं जिनके शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़े-बड़े व्यावसायिक भवन हैं। यह भवन उनकी पत्नी, बच्चों या फिर परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम है। आय से अधिक संपत्ति वाले ऐसे अफसर और बाबू आयकर रिटर्न में सही-सही ब्योरा नहीं भरते, बल्कि आय छिपाने के रास्ते तलाशने के लिए सीए से भी संपर्क करते हैं लेकिन जल्द ही ऐसे लोगों पर नकेल कसने वाली है।
सीमित वेतन में आलीशान कोठियां, सैकड़ों बीघा जमीन खरीदने के साथ ऐसे अफसर और बाबुओं का परिवार विलासिता का जीवन जी रहा है। परिवार का खर्च पूरा करने के साथ उनके बच्चे महंगी शिक्षा भी ले रहे हैं, जहां फीस के रूप में मोटी रकम जमा होती है। जिला प्रशासन, आरटीओ, पीडब्ल्यूडी के भी कई अफसर और बाबू ऐसे हैं जिनके बच्चे दून इंटरनेशनल, सिंधिया बोर्डिंग, बिट्स जैसे बेहद मंहगी शिक्षा देने वाले स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। एडीए में पूर्व में तैनात रहे एक अफसर के बेटे ने ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की। यहां के एक अभियंता का बेटा पुणे में तो एक भवन निरीक्षक का पुत्र बंगलूरू के प्रतिष्ठित कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहा है।
नोटों की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सरकार के निर्देश पर आयकर विभाग ऐसे अफसरों और बाबुओं की सूची तैयार कर रहा है। बेहद गोपनीय तरीके से उनके वेतन, बैंक खातों आदि का हिसाब लिया जा रहा है। आयकर विभाग के सूत्रों की मानें काली कमाई करने वाले कुछ अफसर, अभियंता और बाबुओं की लिस्ट पहले से तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद इस काम में आयकर विभाग के कई अन्य अफसरों को लगाया गया है और उन्हें 31 दिसंबर तक जांच पड़ताल कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। इसके बाद छापे, सर्वे आदि की कार्रवाई होगी।