भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के सामने एक बार फिर लोक सेवा आयोग और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का मुद्दा उठने जा रहा है। आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर अभ्यर्थी अब भी आंदोलनरत हैं। पीसीएस-2016 के रिजल्ट को लेकर उनका असंतोष और बढ़ गया है। ऐसे में प्रतियोगियों का बड़ा वर्ग सपा के साथ भाजपा के विरोध में भी खड़ा हो गया है। सोमवार से विरोध सड़क पर भी दिखने लगेगा। इसके अलावा भाजपा का एक वर्ग इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराज है।
ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा के मुद्दे पर उनकी नाराजगी जाहिर हो चुकी है। अब प्रवेश परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के बाद उनके विरोध को एक और आधार मिल गया है। इसके अलावा विद्यार्थियों का एक वर्ग भी राष्ट्रीय नेताओं के समक्ष विश्वविद्यालय के मुद्दों को उठाने की तैयारी में है, जिन्हें भाजपा तथा संघ के पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में 12 और 13 जून को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में युवाओं का मुद्दा गरमाना तय है।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच कराने का आश्वासन दिया था। इस मांग के आंदोलन में भाजपा के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए, लेकिन प्रतियोगियों की यह मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। अब पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर प्रतियोगियों में असंतोष है। उनका आरोप है कि मेरिट निर्धारण में गड़बड़ी हुई है। उनमें यह भी आशंका है कि आरक्षण नियमों में छेड़छाड़ हुई है। इस मुद्दे पर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति और भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के बैनर प्रतियोगियों ने सपा और भाजपा के खिलाफ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। समिति के अवनीश पांडेय और मोर्चा के कौशल सिंह का कहना है कि दोनों दलाें ने युवाओं को धोखा दिया है। उन्होंने 2017 विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाने की भी घोषणा की।
दो साल पहले चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की गरिमा वापस दिलाने का वादा किया था। हालांकि लंबे इंतजार के बाद विश्वविद्यालय में पांच महीने पहले कुलपति की नियुक्ति तो हो गई, लेकिन परिसर में गतिरोध अब भी बना हुआ है। ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा के मुद्दे पर छात्रसंघ पदाधिकारियों ने कुलपति के फैसले के खिलाफ आंदोलन चलाया। भाजपा सांसदों ने भी उनका समर्थन किया।
इसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और छात्रों की मांग मान ली गई। अभी इसे लेकर तनाव बना हुआ था कि स्नातक प्रवेश परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का तीन-तीन बार परीक्षा केंद्र बदला गया। ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में सर्वर ने भी झटका दिया। पूरी परीक्षा में अफरा-तफरी रही। इसके अलावा कई नियुक्तियों को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णयों पर सवाल उठ रहे हैं। विश्वविद्यालय के अध्यापकों का एक वर्ग पूरे प्रकरण पर राष्ट्रीय नेताओं के संपर्क में है। इसके अलावा छात्रसंघ पदाधिकारियों तथा अन्य छात्र संगठनों की ओर से ज्ञापन सौंपने की भी घोषणा की गई है।