सूबे के पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी के जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव अभी ना कराने के बयान के बाद भाजपाइयों को खासी राहत मिली है। प्रयागराज में केवल 14 जिला पंचायत सदस्य जीतने की वजह से भाजपा को अब जिला पंचायत अध्यक्ष के 43 सदस्यों का समर्थन हासिल करने के लिए काफी वक्त मिल गया है। पार्टी के नेता भी कह रहे हैं कि अब उन्हें चुनावी रणनीति बनाने में ज्यादा आसानी होगी।
प्रयागराज में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पिछले दो दशक से सत्ता पक्ष के प्रत्याशी के ही खाते में आती रही है। सूबे में वर्ष 2017 से भाजपा सत्ता में है और निवर्तमान अध्यक्ष रेखा सिंह पहले भले ही सपा में रही हो लेकिन बाद में वह भाजपा में ही आ गई। हालांकि उन्हें तमाम अड़चनों का भी सामना करना पड़ा लेकिन वह अपना कार्यकाल पूरा करने में जरूर कामयाब हो गई। इस बार जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा के खाते में महज 14 सीटें ही आईं हैं।
यहां जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए 43 सीट का जादुई आंकड़ा भाजपा को हासिल करना है। सपा ने जिला पंचायत सदस्य के लिए इस बार भाजपा से ज्यादा सीट पाने का दावा किया है। हालांकि किंग मेकर की भूमिका में निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य ही हैं। जिले की 84 सीटों में 30 से ज्यादा सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में आई हैं। इस वजह से भाजपा और सपा दोनों ही दल निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने पक्ष में करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
पहले जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव 15 से 20 मई के मध्य ही होना था, लेकिन प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना के मामले को देखते हुए अब यह चुनाव 15 जून के बाद ही संभव है। इस वजह से भाजपा और सपा दोनों ही दलों को पर्याप्त समय मिल गया है। दरअसल भाजपा के लिए परिस्थिति इस बार विपरीत है। उसके 14 सदस्य ही जीतकर आने से वह बहुमत से 29 वोट दूर है। ऐसे में बहुमत पाने में वही प्रत्याशी सफल हो सकेगा जो दूसरे दलों में सेंधमारी करेगा। इसके लिए सभी तरह के तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इस बारे में ब्लॉक प्रमुख रहे अशोक सिंह का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा का ही बनेगा। कई निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा का समर्थन करने की बात कही है।