prayagraj news : केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम।
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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में बुधवार को चर्चा यह भी रही कि वर्ष 2017 की तरह पार्टी अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में एक बार फिर से लड़ेगी। दरअसल पंचायत चुनाव में पार्टी के औसत प्रदर्शन और प्रदेश में अफसर शाही हावी होने की वजह से जमीन से जुड़े भाजपा के बहुत से कार्यकर्ता नाराज चल रहे हैं।
पंचायत चुनाव में पार्टी को पिछड़ी जाति के कम वोट मिलने की बात भी सामने आई है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र देव पांडेय कहते हैं कि विधानसभा चुनाव में अभी समय है। पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा के खाते में 300 से ज्यादा सीटें डाल दी। तब पार्टी को पिछड़ी जाति का भी अच्छा वोट मिला। पंचायत चुनाव में औसत प्रदर्शन के बाद हो सकता है कि पार्टी डिप्टी सीएम को विधानसभा चुनाव को लेकर कोई अहम जिम्मेदारी सौंप दें।
अगर ऐसा होगा तो निश्चित ही पार्टी को विधानसभा चुनाव में फायदा मिलेगा। क्योंकि डिप्टी सीएम की आम लोगों तक अच्छी पकड़ हैं। इस बीच सोशल मीडिया में संगठन के कुछ पदाधिकारियों से लेकर कई मंत्रियों के बदले जाने की खबरें वायरल होती रहीं। यह भी चर्चा रही कि डिप्टी सीएम को भाजपा एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप सकती हैं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
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डिप्टी सीएम के एक करीबी नेता ने बताया कि लखनऊ में संघ पदाधिकारियों की बैठक में क्या हुआ यह जानकारी सिर्फ संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों को ही है। लेकिन इतना जरूर है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व 2022 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार और संगठन में फेरबदल करने के लिए मंथन कर रहा है। भाजपा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी का कहना है कि लखनऊ और दिल्ली में क्या हुआ उसकी जानकारी उन्हें नहीं है। अभी हम सभी का फोकस जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव पर ही है।