एक्सिस बैंक की सिविल लाइंस शाखा से आठ लाख रुपयों भरा बैग उड़ाने की वारदात में बाइक सवार युवक भी शामिल था। रुपयों भरा बैग बैंक से लेकर निकलने वाला बदमाश अपने इसी साथी संग बाइक से भागा था। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात के बाद बदमाश किधर की ओर से भागे। साथ ही उनकी बाइक का नंबर भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
वारदात के बाद पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच की टीम ने जांच पड़ताल शुरू की। मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगालने पर पता चला कि लंबे कद वाला एक युवक करीब तीन बजे बैंक में घुसा। फिर कैश काउंटर के पास पहुंचकर वहां रखा रुपयों भरा बैग लेकर चलता बना। सूत्रों के मुताबिक, जांच पड़ताल के दौरान पुलिस ने बैंक के पास स्थित एक प्रतिष्ठान के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली तो अहम सुराग हाथ मिला।
पता चला कि आठ लाख रुपयों भरा बैग लेकर बैंक से निकलने के बाद बदमाश बाहर बाइक लेकर खड़े अपने एक साथी के पास पहुंचा। फिर अगले ही पल बाइक पर बैठकर उसके साथ भाग निकला। फिलहाल यह नहीं पता चला कि दोनों पत्थर गिरिजाघर की ओर गए या वह सुभाष चौराहे की ओर से भागे। यह भी हो सकता है कि उन्होंने मुख्य मार्ग की जगह कानपुर रोड की ओर जाने वाले किसी अन्य मार्ग का इस्तेमाल किया हो। उधर काफी प्रयास के बाद भी बाइक के नंबर का पता नहीं चल सका। जिसके बाद पुलिस इन दोनों ही बिंदुओं पर जांच पड़ताल में जुटी है।
खराब मिले बाहर लगे दो कैमरे
जांच पड़ताल के दौरान पुलिस को भीतर के कैमरे की फुटेज में तो बैग उड़ाने वाला बदमाश नजर आया, लेकिन बाहर लगे बैंक के दो सीसीटीवी कैमरे खराब मिले। दरअसल इनमें लाइव वीडियो तो देखे जा सकते थे लेकिन रिकॉर्डिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सीओ सिविल लाइंस अजीत सिंह चौहान ने बताया कि बैंक प्रबंधन से सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त करवाने को कहा गया है। बाहर लगे दोनों कैमरे सही होते तो बदमाशों तक पहुंचने में आसानी होती।
सीडीआर से मिलेंगे अहम सुराग
जिस तरह से महज चार मिनटों में इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया, उससे इसमें बैंक के भीतर के किसी व्यक्ति की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पुलिस भुक्तभोगी सीएमएस कंपनी के कलेक्शन एजेंट दारागंज निवासी रितिक मिश्रा, एक अन्य एजेंट अमित व बृजेंद्र समेत कई अन्य की भूमिका की भी जांच में जुटी है। इनके साथ ही घटना के वक्त बैंक के भीतर मौजूद कुछ अन्य लोगों के मोबाइल की सीडीआर भी निकलवाई जा रही है। माना जा रहा है कि कोई भेदिया होने की स्थिति में सीडीआर से भी अहम क्लू मिल सकते हैं।
- बैंक के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही हैं। पूर्व में जो वारदातें हुई हैं, उनके संदिग्धों की तस्वीरों से मिलान किया जा रहा है। - दिनेश कुमार सिंह, एसपी सिटी
एक ही गिरोह तो नहीं
एक्सिस बैंक में जिस तरह से महज चंद मिनटों के भीतर बदमाश आठ लाख रुपयों से भरा बैग लेकर निकल भागा, उससे इसमें किसी गिरोह का हाथ होने की भी आशंका जताई जा रही है। खास बात यह है कि सिविल लाइंस में ही आठ दिन पहले ऐसी ही एक और वारदात हो चुकी है। नौ दिसंबर को बैंक ऑफ इंडिया में रकम जमा करने आए झलवा निवासी रामकृष्ण गुप्ता के दो लाख रुपये लेकर युवक गायब हो गया था। इसका भी पता लगाया जा रहा है कि दोनों वारदातों में एक ही गिरोह का हाथ तो नहीं।