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अब उर्दू व देवनागरी में भी पढ़ सकेंगे बाइबिल

Fri, 03 May 2013 10:56 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
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दुनिया की तमाम भाषाओं और बोलियों के बाद अब पवित्र मसीही ग्रंथ बाइबिल का उर्दू भाषा और देवनागरी लिपि यानी उर्दू-देवनागरी मे भी प्रकाशन किया गया है।
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उत्तर भारत के मसीहियों के लिए बाइबिल उपलब्ध कराने वाली प्रतिष्ठित मसीही संस्था बाइबिल सोसाइटी ऑफ इंडिया की इलाहाबाद ऑक्जीयलरी की पहल और नॉर्थ वेस्ट इंडिया-नई दिल्ली, जबलपुर, रांची ऑक्जीयलरी के सहयोग से उर्दू-देवनागरी में इसका न्यू टेस्टामेंट मसीहियों के बीच है।

न्यू टेस्टामेंट की 27 किताबों के संकलन को नए रूप में 'इंजील-ए-मुकद्दस' नाम दिया गया है।

हालांकि इसके ओल्ड टेस्टामेंट की 39 किताबों में से पहली पांच किताबों के संकलन 'तोरैत' और दाऊद के भजनों के संग्रह 'ज़बूर' का भी उर्दू देवानागरी में अनुवाद किया जा चुका है जो दूसरे नामों से पाठकों के बीच है और शेष भाग का अनुवाद कार्य जारी है।
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दरअसल पूरी बाइबिल 'ओल्ड और न्यू टेस्टामेंट' के आधार पर मुकम्मल होती है। दोनों भागों को मिलाकर ही उर्दू देवनागरी में संपूर्ण बाइबिल पूरी होगी।

इसके अनुवादकों में से एक इलाहाबाद ऑक्जीयलरी के रिचर्ड क्रास के मुताबिक 'इंजील-ए-मुकद्दस' में भूमिका सहित कई कठिन शब्दों के सरलीकरण सहित इसकी शैली में भी बदलाव किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के एकमात्र बाइबिल हाउस के रूप में मशहूर इलाहाबाद ऑक्जीयलरी के सचिव रेव्हरेंड राजन दास के मुताबिक इससे पहले उर्दू पर्शियन और रोमन उर्दू में बाइबिल प्रकाशित की जा चुकी है।

इलाहाबाद ऑक्जीयलरी सहित अनेक हिन्दी भाषी क्षेत्रों में सर्वे के बाद मिली रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों में उर्दू-पर्शियन को बोलने, लिखने वालों की संख्या तेजी से घटी है। वहीं कान्वेंट स्कूलों से पढ़ी नई पीढ़ी भी उर्दू-पर्शियन की जगह देवनागरी से ही परिचित है।

ऐसे में उर्दू देवनागरी की जरूरत महसूस करते हुए इसके अनुवाद की शुरुआत की गई। उम्मीद है कि वर्ष के अंत तक 'ओल्ड टेस्टामेंट' के भी उर्दू-देवनागरी में अनुवाद का काम पूरा कर लिया जाएगा।

ऐसे बनी बाइबिल सोसाइटी
पहले गिरजाघरों के पुरोहितों और कई विशिष्ट व्यक्तियों के पास ही हस्तलिखित बाइबिल होती थी। इस बीच मेरी जोन्स नामक एक लड़की ने भी कड़ी मेहनत से धन हासिल करके पुरोहित से बाइबिल ली। बाद में बाइबिल को लोगों तक पहुंचाने की मुहिम के तहत बाइबिल सोसाइटी बनी।
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ब्रिटिश ऐंड फॉरेन बाइबिल सोसाइटी के विस्तारित कार्य के रूप में भारत में बाइबिल सोसाइटी के आंदोलन की शुरुआत 21 फरवरी 1811 में हुई थी और इलाहाबाद में 11 मार्च 1914 को बाइबिल हाउस की स्थापना की गई।

इसका मुख्य कार्य मसीही साहित्य का दुनिया की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद, प्रकाशन और वितरण है।

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