गोरखपुर की गुत्थी सुलझाने के बाद भाजपा के लिए अब फूलपुर संसदीय सीट से प्रत्याशी का चयन चुनौती बन गया है। इलाहाबाद संसदीय सीट से दस दिन पूर्व कैबिनेट मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी को टिकट देने के बाद पार्टी अब तक तय नहीं कर सकी है कि फूलपुर लोकसभा से किसे उम्मीदवार बनाया जाए। यूं तो इस सीट से पार्टी के तमाम नेताओं ने टिकट के लिए आवेदन किया है लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस सीट के जातीय समीकरण के साथ ही सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार घोषित किए जाने का भी इंतजार कर रहा है।
पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट से तब कई नाम आए थे। तब कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और डिप्टी सीएम केशव मौर्य में मुकाबला था। अंत में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल की पैरवी पर सिद्धार्थनाथ की जगह केशव प्रसाद मौर्य को टिकट मिला। केशव चुनाव जीते भी। इसके बाद पिछले वर्ष हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा से यह सीट सपा ने छीन ली। इस बार भी वर्ष 2014 वाली ही स्थिति फूलपुर में बनी हुई है। टिकट के लिए यहां से काफी नेताओें के नाम सामने आए हैं। पार्टी के भीतर खाने में चर्चा इस बात की है कि केंद्रीय नेतृत्व ने तीन नाम चयन कर लिए हैं। इसमें एक अगड़ी जाति और दो नाम पिछड़ी जाति के हैं। पार्टी पशोपेश में है किसे टिकट दिया जाए।
पार्टी सपा प्रत्याशी का भी इंतजार कर रही है। इस बीच सूबे के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी दिल्ली में ही डेरा जमा लिया है। दरअसल सिद्धार्थ के समर्थक उन्हें इस बार भी उन्हें उम्मीदवार बता रहे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि गोरखपुर से सांसद प्रवीण निषाद को भाजपा ज्वाइन कराने में सिद्धार्थ नाथ की भी भूमिका रही है। हालांकि फूलपुर सीट से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, उनके पुत्र योगेश मौर्य, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केशरी देवी पटेल, विधायक प्रवीण पटेल और उनकी पत्नी गोल्डी पटेल, विक्रम सिंह पटेल, प्रदीप श्रीवास्तव आदि के नाम भी उनके समर्थकों द्वारा पेश किए जा रहे हैं।