नवाबगंज के जगदीशपुर चांधन में कथा का रसपान करते मनीषशरण महाराज
जगदीशपुर चांधन गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को आचार्य मनीष शरण महाराज ने भरत चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि भरत का चरित्र हमें भाई के प्रति निस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण की सबसे बड़ी शिक्षा देता है।
कथा व्यास ने भरत-मिलाप और भरत चरित्र जिक्र तरते हुए कहा कि संसार में भाई हो तो भरत जैसा। जब भगवान श्रीराम को वनवास मिला तो भरत ने अयोध्या का राजपाट स्वीकार करने के बजाय भगवान राम की चरण पादुका को सिंहासन पर रखकर एक सेवक की भांति 14 वर्षों तक तपस्या किया।
उन्हाेंने कहा कि आज के कलयुग में जहां संपत्ति के लिए भाइयों में विवाद होता है, वहीं भरत का चरित्र हमें रिश्तों की अहमियत और त्याग का पाठ पढ़ाता है। कार्यक्रम की मुख्य यजमान व ग्राम प्रधान सावित्री देवी यादव ने अभिवादन किया। यहां अंगद यादव, शिवानंद, शिव पूजन यादव, हरिश्चंद्र, राहुल, अतुल, अंकित, विजय, हितेश आदि रहे।