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Research : बूढ़ा होने से बचाएगा, उम्र भी लंबी करेगा बरबरीन, इविवि के बायोकेमेस्ट्री विभाग के शोध में दावा

Wed, 17 May 2023 01:40 PM IST
विनोद सिंह अमित सरन, प्रयागराज

सार

बायोकेमेस्ट्री विभाग के प्रो. एसआई रिजवी ने उम्र पर काबू पाने (एंटी एजिंग गुण) वाले बरबरीन केमिकल को तलाशा है। यह रसायन उत्तरी हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले दारु हरिद्रा पौधे से मिलता है। पीले या भूरे रंग के इस पौधे को भारतीय बरबेरी या हल्दी ट्री भी कहते हैं।
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दारू हरिद्रा। - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के बायोकेमेस्ट्री विभाग के वैज्ञानिकाें ने एक ऐसा रसायन खोजा है, जो जल्द बूढ़ा तो होने ही नहीं देगा, उम्र भी लंबी करेगा। वैज्ञानिकों का यह शोध एक चूहे पर सफल रहा है। परीक्षण का अगला पड़ाव इंसानों पर होगा। यह शोध पत्र जर्मनी के प्रतिष्ठित जर्नल जेड नेशरोफॉर्श ने प्रकाशित किया है।

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बायोकेमेस्ट्री विभाग के प्रो. एसआई रिजवी ने उम्र पर काबू पाने (एंटी एजिंग गुण) वाले बरबरीन केमिकल को तलाशा है। यह रसायन उत्तरी हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले दारु हरिद्रा पौधे से मिलता है। पीले या भूरे रंग के इस पौधे को भारतीय बरबेरी या हल्दी ट्री भी कहते हैं। बरबरीन का प्रयोग उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, आंख, नाक, कान के रोगों और जख्मों को जल्द ठीक करने में किया भी जा रहा है।

प्रो. रिजवी की टीम ने बरबरीन का प्रयोग सफेद रंग वाले एक मॉडल चूहे पर किया। इसकी उम्र छह माह थी। उसके शरीर में एक निश्चित मात्रा में केमिकल पहुंचाया गया। इसका शरीर पर असर यह हुआ कि जो अंग एक समय के बाद बूढ़े होने के कारण शिथिल पड़ सकते थे, रसायन ने उसकी रफ्तार ही धीमी कर दी। इससे उसकी उम्र भी बढ़ी।

इसी आधार पर शोध पत्र में दावा किया गया है कि इस रसायन के प्रयोग से लंबी उम्र के बाद भी इंसान बूढ़ा नजर नहीं आएगा। उम्र भी क्वालिटी वाली जी सकता है। दरअसल, एक उम्र के बाद किसी भी इंसान की हड्डियां, फेफड़े, हृदय और दूसरे अंग कमजोर पड़ने लगते हैं। चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। बरबरीन केमिकल इनसे बचा सकता है।

प्रो. रिजवी बताते हैं कि चूहे पर प्रयोग सफल होना उत्साहवर्धक है। अगले चरणों में यह शोध कई महत्वपूर्ण परिणाम दे सकता है। ऐसी दवाएं भी बनाई जा सकती हैं, जो जल्दी बूढ़ा होने से बचा लें। बकौल प्रो. रिजवी, यह शोध आगे बढ़ने का सिर्फ रास्ता दिखाता है। इंसानों में शोध की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेजों को ही निभानी होगी।

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समय बचाने के लिए तैयार किया मॉडल चूहा

प्रो. रिजवी के अनुसार सफेद चूहे की उम्र 24 माह होती है। शोध पूरा होने के लिए दो साल का इंतजार न करना पड़े, इसके लिए रिसर्च टीम ने एक मॉडल चूहा तैयार किया, जिसकी उम्र छह माह थी। इससे छह माह में ही चूहे के पूरे जीवन चक्र में रसायन के असर को परखा जा सका।

ऐसे काम करता है बरबरीन

प्रो. रिजवी बताते हैं कि हमारे शरीर की कोशिकाओं में नमक के मध्यम से सोडियम पहुंचता है। हम दूध और अन्य तरीके से कैल्शियम लेते हैं। उम्र बढ़ने पर कोशिकाओं तक सोडियम और कैल्शियम पहुंचने की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है। इससे शरीर के अंग कमजोर होने लगते हैं। बरबरीन के उपयोग से कोशिकाओं में इन तत्वों को पहुंचाने की प्रक्रिया सामान्य हो जाती है।

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