प्रो. रिजवी की टीम ने बरबरीन का प्रयोग सफेद रंग वाले एक मॉडल चूहे पर किया। इसकी उम्र छह माह थी। उसके शरीर में एक निश्चित मात्रा में केमिकल पहुंचाया गया। इसका शरीर पर असर यह हुआ कि जो अंग एक समय के बाद बूढ़े होने के कारण शिथिल पड़ सकते थे, रसायन ने उसकी रफ्तार ही धीमी कर दी। इससे उसकी उम्र भी बढ़ी।
इसी आधार पर शोध पत्र में दावा किया गया है कि इस रसायन के प्रयोग से लंबी उम्र के बाद भी इंसान बूढ़ा नजर नहीं आएगा। उम्र भी क्वालिटी वाली जी सकता है। दरअसल, एक उम्र के बाद किसी भी इंसान की हड्डियां, फेफड़े, हृदय और दूसरे अंग कमजोर पड़ने लगते हैं। चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। बरबरीन केमिकल इनसे बचा सकता है।
प्रो. रिजवी बताते हैं कि चूहे पर प्रयोग सफल होना उत्साहवर्धक है। अगले चरणों में यह शोध कई महत्वपूर्ण परिणाम दे सकता है। ऐसी दवाएं भी बनाई जा सकती हैं, जो जल्दी बूढ़ा होने से बचा लें। बकौल प्रो. रिजवी, यह शोध आगे बढ़ने का सिर्फ रास्ता दिखाता है। इंसानों में शोध की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेजों को ही निभानी होगी।
समय बचाने के लिए तैयार किया मॉडल चूहा
प्रो. रिजवी के अनुसार सफेद चूहे की उम्र 24 माह होती है। शोध पूरा होने के लिए दो साल का इंतजार न करना पड़े, इसके लिए रिसर्च टीम ने एक मॉडल चूहा तैयार किया, जिसकी उम्र छह माह थी। इससे छह माह में ही चूहे के पूरे जीवन चक्र में रसायन के असर को परखा जा सका।
ऐसे काम करता है बरबरीन
प्रो. रिजवी बताते हैं कि हमारे शरीर की कोशिकाओं में नमक के मध्यम से सोडियम पहुंचता है। हम दूध और अन्य तरीके से कैल्शियम लेते हैं। उम्र बढ़ने पर कोशिकाओं तक सोडियम और कैल्शियम पहुंचने की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है। इससे शरीर के अंग कमजोर होने लगते हैं। बरबरीन के उपयोग से कोशिकाओं में इन तत्वों को पहुंचाने की प्रक्रिया सामान्य हो जाती है।