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खुद बेजार है विवि का रोजगार सेल

Wed, 24 Feb 2016 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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स्टार्ट अप, स्किल इंडिया योजनाओं का शिक्षण संस्थानों में सबसे अधिक जोर है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। इतना ही नहीं युवाआें को रोजगार के योग्य बनाने के लिए वोकेशनल कोर्सेज पर भी जोर है। ऐसे पाठ्यक्रमों के चयन के लिए विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों की समिति बनाई गई है लेकिन इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाया गया संस्थान का रोजगार सेल खुद बेजार है। सेल की ओर से लंबे समय से कोई गतिविधि नहीं हुई है। हुई भी तो सिर्फ खानापूर्ति। कैंपस सेलेक्शन तो कई वर्षों से नहीं हुआ है।
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पांच साल पहले छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के रोजगार सेल से काफी उम्मीदें हुआ करती थीं। स्किल डेवलपमेंट, अंग्रेजी की पढ़ाई के अलावा कई अन्य तरह की गतिविधियां संचालित होती रहीं। विद्यार्थियों के चयन के लिए पूरे वर्ष कंपनियों के आने का क्रम बना रहता था। सेल की ओर से साल में एक बार कॅरियर मेला का आयोजन होता था। इसमें 20 से अधिक कंपनियां, बैंक आदि शामिल होते थे। इनमें विप्रो, टीसीएस, इंफोसिस जैसी मल्टीनेशनल कंपनियां शामिल थीं। सेल की मदद से कई साल दो हजार से अधिक विद्यार्थियों को इन कंपनियों में नौकरी मिली। नौकरी पाने वालों में विश्वविद्यालय के साथ कालेज के विद्यार्थी भी शामिल रहे, लेकिन अब इस सेल की सभी गतिविधियां ठप हैं।
प्रोफेसर एके सिंह के कुलपति बनने के बाद से ही इसकी गतिविधियों पर विराम लग गया था। कंपनियों के आने का क्रम भी अचानक बंद हो गया। हालांकि प्रोफेसर एके सिंह के समय में भी कॅरियर मेला के आयोजन की घोषणा की गई। प्रोफेसर रंजना प्रकाश की जगह प्रोफेसर एनके शुक्ला को सेल का निदेशक बनाया गया। साथ में सेल को विस्तार देने की योजना बनाई गई, लेकिन बजट, सुविधाओं तथा अन्य विवादों की वजह से योजना फाइलों में ही दबी रह गई। साथ ही छात्र-छात्राओं की उम्मीदें टूटती गईं। निदेशक प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है कि पिछले दिनों कार्यक्रम कराए गए। पांच मार्च को आईटीआर पर कार्यशाला है। उनका कहना है कि जल्द ही इसका विस्तार होगा।
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विवि में केंद्रीय रोजगार सेल के अलावा जेके इंस्टीट्यूट, मोनिरबा, विधि आदि विभागों में भी प्लेसमेंट के लिए संस्था हैं। ये संस्थाएं सक्रिय भी हैं। इन्हें केंद्रीय सेल से जोड़े जाने की योजना बनाई गई थी। इतना ही नहीं कालेजों में प्लेसमेंट सेल की स्थापना के साथ उन्हें इससे जोड़ने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसे भी पूरा नहीं किया जा सका। इसका मकसद अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को लाभ पहुंचाना था।
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