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हत्यारोपी पुलिस वालों पर नरमी बरतने में डीजीपी तलब

Wed, 12 Aug 2015 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। उन्नीस साल पहले फर्जी एनकाउंटर में आरोपी बनाए गए 20 पुलिसकर्मियों पर नरमी बरतने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इतने लंबे समय तक आरोपियों के आजाद घूमने और मुकदमे का ट्रायल तक शुरू न होने पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को तलब कर लिया है। उनसे पूछा है कि इस लापरवाही के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई की जानी चाहिए। डीजीपी को 26 अगस्त को न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना है।
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फर्जी एनकाउंटर में मारे गए देवेंद्र प्रसाद सिंह की पत्नी विंध्याचली देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति आरडी खरे ने दिया है। याचिका में कहा गया कि मामले में आरोपी सभी 18 पुलिसकर्मी न सिर्फ आजाद घूम रहे हैं, बल्कि उनको विभागीय प्रोन्नति आदि भी दी जा रही है।

इस पर अदालत ने 24 जुलाई को डीजीपी से आख्या मांगी थी। पुलिस विभाग द्वारा दी गई जानकारी से पता चला कि 20 अभियुक्त पुलिसकर्मियों में से आठ को गिरफ्तार किया गया जबकि छह अभियुक्तों ने आत्मसमर्पण कर दिया। पांच की मृत्यु हो चुकी है। एक कास्टेबल सभापति यादव के खिलाफ कुर्की का वारंट जारी है। रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा है स्पष्ट है कि यह सारी कार्रवाई 24 जुलाई 2015 को हाईकोर्ट द्वारा सख्त आदेश देने के बाद हुई है। इससे पहले इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया। जबकि सीजेएम भदोही ने 10 अप्रैल 2014 को ही अभियुक्तों को प्रस्तुत करने के लिए पत्र भेजा था। अदालत ने पुलिस के इस कृत्य को न्याय प्रशासन के निष्पादन में हस्तक्षेप मानते हुए डीजीपी को तलब किया है।
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उल्लेखनीय है कि मिर्जापुर के चील्ह थाना क्षेत्र के सेमरा गांव निवासी देवेंद्र प्रसाद सिंह को पांच अप्रैल 1987 को फर्जी एनकाउंटर दिखाकर पुलिस ने गोपीगंज (भदोही) में मार दिया था। इस मामले में थाना गोपीगंज में 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले की जांच सीबीसीआईडी ने की और सभी 20 आरोपियों के खिलाफ 1994 में चार्जशीट दाखिल कर दी। सीजेएम भदोही ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए अभियुक्तों को गैरजमानती वारंट जारी किया था इसके बावजूद कोई भी पुलिसकर्मी हाजिर नहीं हुआ और न ही किसी की गिरफ्तारी की गई।
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