प्रयागराज। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच बनाए जाने को लेकर विवाद में घिरे बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह के बयान से खुद बार कौंसिल ने किनारा कर लिया है। बयान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तीखी प्रतिक्रिया आने के बाद लखनऊ से प्रयागराज आए कौंसिल के उपाध्यक्ष प्रशांत सिंह अटल ने सोमवार को पत्रकारों के सामने स्थिति साफ की। प्रशांत का कहना है कि हरिशंकर सिंह ने जो भी बयान दिया है, वह उनकी निजी सोच हो सकती है। कौंसिल ऐसी कोई राय नहीं रखती है।
उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बार कौंसिल का ऐसा न तो एजेंडा है और न ही इस संबंध में कोई बैठक कर प्रस्ताव पास किया गया है। कौंसिल की किसी बैठक में इस मुद्दे पर आज तक कोई चर्चा भी नहीं हुई है। अध्यक्ष ने बार कौंसिल की नहीं, बल्कि अपनी निजी राय जाहिर की है। उन्होंने कहा शेष 24 सदस्य उनकी इस राय सहमत नहीं हैं। अटल का कहना है कि बार कौंसिल अधिवक्ताओं के किसी भी विवादित मुद्दे से वास्ता नहीं रखती है। उसका काम प्रदेश के अधिवक्ताओं के कल्याण हेतु काम करना और उनके लिए हितकारी योजनाओं को लागू करवाना है। उन्होंने बताया कि कुछ समस्याओं के चलते पिछले तीन माह से कौंसिल की नियमित बैठकें भी नहीं हो पा रही हैं।
अटल ने बताया कि नए वकीलों को पांच साल तक स्टेशनरी और किताबों के खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये प्रतिमाह देने का शासनादेश जारी हो चुका है। इसे नौ मार्च 2020 से प्रभावी कर दिया जाएगा। विभिन्न जिला न्यायालयों में वकीलों के चैंबर हेतु सांसद और विधायक निधि से अनुदान दिलाए गए हैं। इस पर काम चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि बार कौंसिल के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने गत दिनों मेरठ दौरे के समय पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की बेंच बनाने का समर्थन किया था। इस बयान पर इलाहाबाद बार एसोसिएशन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रविवार को आपात कालीन बैठक बुलाकर निंदा की और अध्यक्ष को पद से बर्खास्त करने की मांग की है। वकीलों ने हरिशंकर सिंह का हाईकोर्ट में प्रवेश रोकने का भी प्रस्ताव पास किया है।
प्रयागराज। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह के पश्चिमी यूपी में बेंच बनाने संबंधी बयान को लेकर हाईकोर्ट के वकीलों में खासी नाराजगी है। रविवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा पारित निंदा प्रस्ताव के बाद सोमवार को भी वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया।
अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला के नेतृत्व में वकील दिन में एक बजे गेट संख्या तीन पर एकत्र हुए और हरिशंकर सिंह का पुतला जलाया। वकीलों ने मांग की है कि अध्यक्ष को तत्काल बर्खास्त किया जाए और बार कौंसिल उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करता है तो वकील आमरण अनशन करेंगे। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी वकीलों का समर्थन किया है।
पुतला दहन में अजीत कुमार यादव, विजय सिंह सेंगर, प्रियदर्शी त्रिपाठी, आशुतोष पांडेय, सर्वेश शुक्ला, अंबुल शुक्ला, संजीव कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह, राहुल सिंह, पुनीत शुक्ला, ओम आनंद, मुकुल पांडेय, संजय दुबे, सर्वेश्वरी प्रसाद सहित बड़ी संख्या में वकील मौजूद थे।
अध्यक्ष का बयान निंदनीय: नगरहा
प्रयागराज। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्य और उपाध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा ने अध्यक्ष हरिशंकर सिंह के बयान की निंदा करते हुए कहा है कि बार कौंसिल पूरे प्रदेश के वकीलों का प्रतिनिधित्व करता है। वह संरक्षक की भूमिका में हैं। अध्यक्ष का बयान उनका निजी विचार हो सकता है जिसका बार कौंसिल से कोई सरोकार नहीं है।
बार कौंसिल में हाईकोर्ट के सात सदस्य
प्रयागराज। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सात सदस्य हैं। यह सभी हाईकोर्ट में ही वकालत करते हैं। इनमें योगेंद्र स्वरूप, सीनियर एडवोकेट बीके श्रीवास्तव, इमरान माबूद खान, पांचू राम मौर्य, अमरेद्र नाथ सिंह, अजय यादव और देंवेंद्र मिश्र नगरहा शामिल हैं। इस लिहाज से कौंसिल में इलाहाबाद हाईकोर्ट का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक बनता है।
कौंसिल के सदस्य करें भर्त्सना: राकेश पांडेय
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय बबुआ ने बार कौंसिल के सदस्यों से अपेक्षा की है कि वह भी उपाध्यक्ष प्रशांत सिंह अटल और देवेंद्र मिश्र नगरहा का अनुसरण कर अध्यक्ष के बयान की निंदा करें।
राकेश पांडेय के ही कार्यकाल में 2015 में हाईकोर्ट के वकीलों ने बेंच के मुद्दे पर 30 दिन तक हड़ताल की थी। इससे पूर्व वीसी मिश्र के कार्यकाल में इस मुद्दे पर करीब 85 दिन तक हाईकोर्ट के अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। हालांकि जानकार मान रहे हैं चूंकि बार कौंसिल की बेंच बनाने मेें कोई भूमिका नहीं होती इसलिए हरिशंकर सिंह के बयान का भी इस लिहाज से अहमियत नहीं है।