रोहित कुमार जायसवाल ने ओम नारायण त्रिपाठी के खिलाफ मनगढ़ंत व फर्जी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का भी आरोप लगाया था। अनुशासनात्मक समिति ने जांच में सारे आरोप बेबुनियाद व झूठे पाए और शिकायत निरस्त कर दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम ओम नारायण त्रिपाठी के खिलाफ उत्तर प्रदेश बार कौंसिल अध्यक्ष से की गई निराधार व फर्जी शिकायत बार कौंसिल की अनुशासनात्मक समिति ने पांच लाख रुपये अर्थदंड के साथ खारिज कर दी है। साथ ही जिलाधिकारी प्रयागराज को शिकायतकर्ता रोहित कुमार जायसवाल से राजस्व प्रक्रिया के तहत वसूली करने का आदेश दिया है।
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रोहित कुमार जायसवाल ने ओम नारायण त्रिपाठी के खिलाफ मनगढ़ंत व फर्जी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का भी आरोप लगाया था। अनुशासनात्मक समिति ने जांच में सारे आरोप बेबुनियाद व झूठे पाए और शिकायत निरस्त कर दी। जिस ओम नारायण त्रिपाठी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का जिक्र किया गया, वह दूसरे व्यक्ति हैं। उनके पिता का नाम भी अलग है।
समिति ने कहा कि शिकायतकर्ता ने 1998 से वकालत करने वाले और पिछले 20 साल से एजीए ओम नारायण पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की है। इसलिए शिकायतकर्ता पर पांच लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। इसमें से साढ़े चार लाख रुपये बार कौंसिल में जमा होंगे और शेष 50 हजार रुपये ओम नारायण त्रिपाठी को दिए जाएंगे।