बैंक मैनेजर हत्याकांड
अर्थी संग उठा साया, आंसुओं का सैलाब बह आया
या
बेटियां रह-रह कर रोती रहीं, पत्नी बिलखते-बिलखते बेसुध
0 दोपहर में अंतिम यात्रा निकली तो लोगों की भी आंखें हुई नम
0 रसूलाबाद घाट पर हुआ अंतिम संस्कार, बेटे ने दी मुखाग्नि
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। मऊआइमा में बदमाशों की गोली का शिकार बने बैंक मैनेजर अनिल कुमार दोहरे के शव का अंतिम संस्कार शनिवार को हुआ। इस दौरान उनके परिजनों की चीत्कार से मोहल्ले में कोहराम मचा रहा। बच्चों व पत्नी की हालत देख वहां मौजूद अन्य लोगों की भी आंखें नम हो गईं।
मृतक अनिल के शव का पोस्टमार्टम शुक्रवार शाम को ही हो गया था। हालांकि, उनके परिजनों के न आ पाने के कारण अंतिम संस्कार शनिवार को करने का निर्णय लिया गया था। सुबह हैदराबाद में रहने वाले उनके बड़े भाई सुनील कुमार दोहरे शहर पहुंचे। उधर, लखनऊ व जोधपुर में रहने वाली बहनें अनीता व सुनीता भी आ गईं। तीन भाइयों मेें अनिल मझले थे, जबकि रोहित सबसे छोटे हैं। कानपुर में रहने वाला माता-पिता रात में ही पहुंच गए थे। परिजनों के आने के बाद सुबह अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं। दोपहर 12 बजे के करीब अर्थी उठी, तो परिजनों की चीत्कार से कोहराम मच गया। पत्नी मंजू बदहवास सी हो गई थीं। तीनों बच्चों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। इस दौरान बड़ी संख्या में मोहल्ले व बैंककर्मी भी पहुंचे थे। घरवालों की हालत देख उनकी भी आंखें नम हो गईं। दोपहर एक बजे के करीब शव लेकर परिजन रसूलाबाद घाट पहुंचे जहां अंतिम संस्कार किया गया। 11वीं में पढ़ने वाले बेटे श्रेष्ठ ने पिता को मुखाग्नि दी। पार्षद अखिलेश सिंह भी सुबह से ही वहां मौजूद रहे और परिजनों को ढांढस बंधाते रहे।
रोते-रोते बेसुध हुई बेटी
पिता की मौत से तीनों बच्चों को गहरा सदमा पहुंचा है। बड़ी बेटी रीतू तो रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। कुछ देर बाद जैसे ही होश आता, वह फिर पापा को याद कर बिलखने लगती थी। उधर छोटी बेटी खुशबू भी पिता की लाश के पास बैठकर फूट-फूटकर रोती रही। मां-बहनों को बिलखते देख श्रेष्ठ उन्हें संभालने, हिम्मत देने की कोशिश करता लेकिन उनकी हालत देख उसकी भी आंखों से आंसू बहने लगते।