राष्ट्रीयकृत बैंकों में क्लर्क भर्ती परीक्षा के नियमों में बदलाव करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार से जानकारी मांगी है। पूछा है कि किस वजह से विज्ञापन जारी होने केबाद नियमों में परिवर्तन किया गया है। सुशील कुमार बाजपेयी और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि बैंक क्लर्क भर्ती के लिए 26 जुलाई 2015 को विज्ञापन जारी किया गया था। चयन प्रांरभिक और मुख्य लिखित परीक्षा तथा साक्षात्कार के आधार पर होना था। इस दौरान 15 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्लर्क ग्रेड की परीक्षाओं में साक्षात्कार समाप्त करने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद केंद्र सरकार ने 22 दिसंबर 2015 को सकुर्लर जारी कर क्लर्क भर्ती में साक्षात्कार समाप्त कर दिया।
परीक्षा आयोजन करने वाली एजेंसी बैंकिंग पर्सनल सर्विसेज ने भी नौ मार्च 2016 को साक्षात्कार समाप्त किए जाने की घोषणा कर दी। याची अधिवक्ता का कहना था कि विज्ञापन जारी होने के बाद परीक्षा की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है इसके बाद नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। साक्षात्कार समाप्त करने से मुख्य परीक्षा की कट ऑफ मेरिट में इजाफा हो जाएगा जिससे याची को नुकसान होगा। याचिका पर 10 मई को सुनवाई होगी।