प्रयागराज। मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे के लिए इसी माह से काश्तकारों की भूमि का बैनामा शुरू हो जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए तैयारी की जा रही है। काश्तकारों को नोटिस भेजा गया है और नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है। प्रशासनिक अफसरों के मुताबिक बैनामा की कार्यवाही मई तक पूरी होगी। शासन ने भी इसके लिए अपनी अनुमति दे दी है। बैनामा उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के पक्ष में कराया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे जिले में पश्चिमनारा, पूरबनारा, जलिया सई, समसपुर, सरायमदन सिंह चांटी, तरती, गिरधरपुर, सराय भारत, रोही, सेमकरनपुर, जुड़ापुरदादू, परसूपुरनारी, सरायहरिराम, लखनपुरकरन, सराय अर्जन, मालापुर, कमालपुर, माधोपुर मलाक चतुरी, बारी गांवों से होकर गुजरेगा। इन गांवों में तकरीबन 3600 काश्तकारों की 183 हेक्टेयर भूमि चिह्ति की गई है। इसमें 16 हेक्टेयर भूमि ग्राम सभा की है, जिसमें आबादी, नवीन परती, चरागाह, उसर, बंजर आदि भूमि शामिल है। इसके अलावा 167 हेक्टेयर भूमि 3600 काश्तकारों से अधिग्रहीत की जाएगी। एडीएम वित्त मार्तंड प्रताप सिंह ने कहा कि एलाइनमेंट का काम पूरा होने के बाद भूमि अधिग्रहण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था।
शासन ने पिछले हफ्ते ही भूमि अधिग्रहण की अनुमति दी है। अब बैनामे की कार्यवाही के लिए किसानों से बातचीत शुरू की गई है। किसानों से हुए समझौते और सर्किल रेट के चार गुना के रेट से भूमि का बैनामा कराया जाएगा। यह प्रक्रिया फरवरी के अंतिम हफ्ते से शुरू होगी और मई तक चलेगी। जिन किसानों की भूमि गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही है, उन्हें पहले ही नोटिस के जरिए सूचित कर दिया गया है। काश्तकारों से उनकी भूमि की खतौनी के साथ अन्य जरूरी कागजात और बैंक एकाउंट नंबर मांगे जा रहे हैं, जिससे बैनामे के बाद उनकी भूमि का पैसा उनके खाते में सीधा भेजा जा सके।
एडीएम ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के लिए चिह्नित की गई 183 हेक्टेयर भूमि सोरांव तहसील के अंतर्गत आती है। इसलिए बैनामे की कार्यवाही का जिम्मा सोरांव तहसील के अधिकारियों को सौंपा गया है। अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि को यूपीडा को सौंप दिया जाएगा। भूमि अधिग्रहण के बाद यूपीडा एक्सप्रेसवे का निर्माण करेगा। उधर, शासन की ओर से गंगा एक्सप्रेसवे को विस्तार देने के लिए विचार किया जा रहा है। मेरठ से हरिद्वार तक और प्रयागराज से वाराणसी तक तकरीबन 150 किलोमीटर तक एक्सप्रेस वे को बढ़ाए जाने की योजना है। इससे एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 596 किलोमीटर तक हो जाएगी।