याची के अधिवक्ता लोकेश कुमार द्विवेदी का कहना था कि पाँच नवम्बर 2020 को शाम पाँच बजे ध्वस्तीकरण का आदेश किया और 15 मिनट के भीतर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। याची को बचाव का मौका भी नहीं दिया गया।
यह भी कहा गया कि मकान इंद्रकली और रामलली दोनों याचियो के नाम है। पीडीए ने केवल एक को ही नोटिस दिया है। पूर्व स्वामी ने तीन फरवरी 80 को ही एडीए से नक्शा पास करवाकर निर्माण की अनुमति ली थी। याचीगण ने खुद ही कहा था कि नक्शे के विपरीत निर्माण पाये जाने पर वह स्वयं हटा लेगे। इसकी अनदेखी कर स्वीकृत नक्शे के अनुसार बने निर्माण गिराए गए है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है और जवाब मांगा है।