इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के सदर तहसील में स्थित एक विवादित भूमि पर ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है तथा प्रदेश सरकार से 31 अगस्त तक मामले पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने विवादित प्रापर्टी के स्वरूप में भी किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं करने का आदेश दिया है। वीना सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने यह आदेश दिया।
याची का कहना था कि उसने गैर जमींदारी विनाश अधिनियम की जमीन जमींदार से खरीदी थी। जिसका कुछ हिस्सा तालाब है। इस भूमि पर किए गए निर्माण को प्रशासनिक आदेश से गिराया जा रहा है जबकि उसने सिविल कोर्ट में सूट दाखिल कर अस्थायी निषेधाज्ञा का आदेश जारी करने की मांग की है जो अभी लंबित है। कोर्ट ने इस मामले एसडीएम गौरव सिंह सोगरवाल को तलब किया था।
एसडीएम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की बात स्वीकार की। याची के अधिवक्ता का कहना था कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किसी कानून के तहत या अदालत के आदेश से ही हो सकती है। प्रशासनिक आदेश से नहीं की जा सकती है।
सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि पानी से घिरी हुई जमीन के संबंध में राज्य सरकार को अवैध निर्माण हटाने का अधिकार है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विवादित स्थल पर ध्वस्तीकरण रोकने और राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। एसडीएम को अगली सुनवाई पर हाजिर होने से छूट प्रदान कर दी है।