इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घर में घुसकर तमंचे के बल पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। वहीं, पीड़िता व सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज बजाज ने याची बृजेश कुमार व इंद्रजीत की ओर से दाखिल आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर अधिवक्ता विपिन गंगवार को सुनकर दिया है। यह चर्चित मामला बरेली के नवाबगंज थाना क्षेत्र का है। पीड़िता याचियों के खिलाफ शिकायत लेकर थाने पहुंची थी।
रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय पुलिस ने उसके पति को ही हवालात में बैठा दिया। वह गुहार लगाती रही, लेकिन पुलिस ने उसे नहीं छोड़ा। इससे आहत होकर महिला ने थाने के बाहर जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद पुलिस ने उसके पति को छोड़ा और याचियों के खिलाफ मुकदमा लिखा गया।
पीड़िता ने तहरीर में आरोप लगाया कि गांव के दबंगों ने घर में घुसकर तमंचे के बल पर दुष्कर्म किया। विरोध पर दबंगों ने उसे पीटा और जान से मारने की धमकी दी। विवेचना के बाद पुलिस ने याचियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसे याचियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अधिवक्ता विपिन गंगवार ने दलील दी कि पीड़िता के पति ने याचियों के पक्ष में एक जमीन का बैनामा कराया था। दोनों पक्षों के बीच दाखिल-खारिज का मुकदमा लंबित है। पक्षकारों के बीच रुपयों के लेनदेन को लेकर आपसी झगड़ा हुआ था। पीड़िता ने 2023 में छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसकी विवेचना में याची निर्दाेष पाए गए हैं। इसके बाद पीड़िता ने 2024 में सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने में जहर खा लिया। इसके दबाव में पुलिस ने याचियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया और आरोप पत्र दाखिल कर दिया, जो अवैधानिक है।