करनाईपुर क्षेत्र के कहली दुलहेपुर गांव में बांस के पुल बनाकर पार करते लोग
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बहरिया क्षेत्र के कहली गांव से बहने वाली मनसैता नदी और उमरनताल ड्राइगन नाले पर बने बांस के अस्थायी पुल से रोजाना करीब 500 से ज्यादा लोगों का खेत आना-जाना होता है। पुल जर्जर होने की वजह से आवागमन जोखिमभरा है। ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों में बोई फसलों को लाने में सबसे ज्यादा कठिनाई होती है। अगर कभी पुल टूट जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
किसानों ने बताया कि बारिश में नाले में पानी भर जाने पर पुल पार करना और भी खतरनाक हो जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से स्थायी पुल बनाने की मांग की गई लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
वर्जन
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. बीके सिंह को पुल निर्माण के लिए पत्र दिया गया था। उन्होंने जल्द निर्माण कराने का आश्वासन दिया है। - इंद्रजीत सरोज, जिला पंचायत सदस्य, कहली।
हम लोगों को खेत जाने-आने के लिए रोजाना बांस के पुल को पार करना पड़ता है। जो जोखिमभरा है। अगर अस्थायी पुल को स्थायी बना दिए जाए तो आसानी होगी। -उमाशंकर यादव, कहली।
पुल बनाने की मांग कई बार जनप्रतिनिधियों से की जा चुकी है लेकिन आश्वासन ही मिला। अभी तक पुल बनाने को लेकर कोई सुनवाई नहीं हुई। - दिलीप कुमार पटेल, कहली दुलहेपुर।
गांव की आबादी करीब 2000 है। अधिकांश लोगों का बांस के पुल से ही आवागमन होता है। बच्चे-बुजुर्ग भी इसी पुल का सहारा लेते हैं। जर्जर पुल पर स्थायी निर्माण जरूरी है। संदीप कुमार पटेल, कहली दुलहेपुर।
बारिश में सबसे ज्यादा खतरा रहता है। आने-जाने में बांस का पुल हिलता रहता है। जो वजह से डर लगता है। - भारत लाल पटेल, कहली दुलहेपुर।