भूमिहीन बलराम पांडेय को जिंदगी की नई आस फिर से जगी है। टीबी के चलते वह दो महीने से घर पर पड़ा था। पैसों के अभाव में परिवार के लोग इलाज नहीं करवा पा रहे थे। गांव के लोगों ने सोशल मीडिया पर दम तोड़ती बलराम की जिंदगी को लेकर खबर वॉयरल किया तो अफसरों की नींद टूटी।
सोशल मीडिया पर जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कौशांबी के डीएम मनीष वर्मा को मदद पहुंचाने के निर्देश दिए। इस पर सीडीए और सीएमओ बुजुर्ग बलराम पाण्डेय के गांव पहुंचे और उसे अस्पताल में भर्ती कराया।
बलराम एक झोपड़ीनुमा घर में पत्नी शांति और दस बच्चों के साथ रहता है। पिछले कुछ दिनों से बलराम टीबी से ग्रसित था। दो महीने से वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गया। परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण, उसका इलाज नहीं हो पा रहा है। बलराम को सिर्फ पात्र गृहस्थी का कार्ड बना है, जिसमें 35 किलो अनाज ही उसे मिलता है।
आयुष्मान भारत योजना का कार्ड भी नहीं बना था। इसे लेकर गांव के किसी व्यक्ति ने बलराम की हालत सोशल मीडिया पर वॉयरल कर दिया। इस पर तमाम लोगों ने अपने कमेंट व दर्द भरी कहानी को शेयर किया। नतीजतन मामला अफसरों तक पहुंचा। गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी इंद्रसेन सिंह, सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी, डीपीआरओ गोपाल जी ओझा बलराम के घर पहुंचे।
सीडीओ के निर्देश पर सीएमओ ने बलराम को एंबुलेंस से इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा। इसके अलावा बलराम के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाए जाने का आश्वासन दिया।
अफसरों के सामने भिड़े प्रधान-बीडीसी
बारा। बलराम पांडेय को देखने गांव पहुंचे अफसरों के सामने ही प्रधान और बीडीसी भिड़ गए। बीडीसी व उसके सर्मथक आवास, शौचालय सहित तमाम कामों में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे थे। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने लगी। बाद में जिला पंचायतराज अधिकारी ने जांच कराने का आश्वासन देकर किसी तरह दोनों पक्षों को शांत कराया।