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जमानत नियम, जेल, अपवाद, जमानत देना जज के विवेक पर निर्भर- हाईकोर्ट

Fri, 02 Jul 2021 08:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक केस में जमानत नियम तो जेल अपवाद है, किन्तु जमानत देना अपराध के तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए जज के विवेक पर निर्भर करता है। कोर्ट ने कहा दुराचार के साक्ष्य पर ट्रायल के समय विचार होगा। यह देखा जाएगा कि पीड़िता के साथ उचित न्याय हो।
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कोर्ट ने नाबालिग के साथ दुराचार कर वीडियो वायरल करने व धमकाने के आरोपी रिजवान को जमानत पर रिहा करने से इनकार करते हुए अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है।

मंडी जिले की कोतवाली मे नाबालिग बच्ची के गर्भवती होने पर पांच माह बाद 28 जनवरी 2018 को एफआईआर दर्ज कराई गई है। लड़की ने अपनी मां से  उसके साथ हुए दुराचार की घटना बताई। जब मेडिकल जांच हुई तो रिपोर्ट आई कि बाह्य चोट नहीं है। इसके आधार पर आरोपी रिजवान ने कहा उसे फंसाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा लड़की का बयान और आरोपी की धमकी अपराध की गंभीरता बता रहे है। पांच माह बाद जांच रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों पर तय होगी।इसके आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
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