सितंबर 2021 में हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने एम्स, नई दिल्ली के मेडिकल बोर्ड से भी चिकित्सकीय राय ली। बोर्ड की समीक्षा में शरीर पर कई गंभीर और मृत्यु पूर्व लगी चोटें सामने आने की बात कही गई। सीबीआई ने 22 फरवरी 2022 को 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष सीबीआई अदालत ने सितंबर 2024 में आरोप तय कर सुनवाई शुरू की।
हाईकोर्ट ने जयशील तिवारी के मामले में उसके पूर्व में फरार रहने को भी जमानत के खिलाफ महत्वपूर्ण तथ्य माना। वहीं रामकृत यादव और राजकुमार वर्मा की दूसरी जमानत अर्जियों में कोई नया आधार नहीं पाया गया। कोर्ट ने कहा कि केवल मुकदमे में लगने वाला समय या सह-आरोपी के आधार पर समानता का दावा जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि अनावश्यक स्थगन दिए बिना मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाई जाए।