फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : राम जन्मभूमि पर हमला करने वाले आतंकियों की जमानत मंजूर, 2005 में राम जन्मभूमि पर हुआ था आतंकी हमला

Wed, 20 Sep 2023 08:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद जिला सत्र न्यायालय ने चारों आतंकियों को 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इनमें शकील अहमद, मोहम्मद नसीम और आसिफ इकबाल उर्फ फारुख जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के निवासी हैं।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 में अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर में आतंकी हमले की साजिश में दोषी करार दिए गए शकील अहमद, मोहम्मद नसीम, आसिफ इकबाल उर्फ फारुख और डॉ. इरफान की जमानत कड़ी शर्तों के साथ मंजूर कर ली है। इन्हें जिला अदालत में पासपोर्ट जमा करने के साथ हर हफ्ते नजदीकी थाने में हाजिर होना होगा। चारों दोषी 18 साल से नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं। कोर्ट ने इनकी सजा के खिलाफ अपील पर चार दिसंबर को सुनवाई नियत की है।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति अश्वनी मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। इलाहाबाद जिला सत्र न्यायालय ने चारों आतंकियों को 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इनमें शकील अहमद, मोहम्मद नसीम और आसिफ इकबाल उर्फ फारुख जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के निवासी हैं। दोषी डॉ. इरफान सहारनपुर के थाना तीतरो स्थित शेख जादगानान का रहने वाला है। इन सभी ने सजा के खिलाफ अपील करते हुए जमानत याचिका भी दाखिल की थी।

सख्त शर्तों के साथ कोर्ट ने दी जमानत

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलार्थियों की यह पहली जमानत याचिका है। मामले के तथ्य और साक्ष्य से जुड़ीं दलीलें विचारणीय हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुक्रम में देखते हैं तो लंबित अपीलों पर सुनवाई में वक्त लग सकता है, इसलिए गुण-दोष पर टिप्पणी किए बगैर दोषियों को सख्त शर्तों के साथ जमानत देती है।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी सप्ताह में एक बार अपने नजदीकी पुलिस थाना को रिपोर्ट करेंगे। इनके पास यदि पासपोर्ट है तो वे इन्हें संबंधित अदालत में जमा करेंगे। इन पर लगाए गया जुर्माना रिहाई के छह सप्ताह के भीतर जमा करेंगे। जमानत के बॉन्ड स्वीकार होने पर निचली अदालत इनकी प्रतियां रिकाॅर्ड के लिए इस अदालत के पास भेजेगी।

विज्ञापन

कोर्ट ने कहा

रिकॉर्ड पर गौर करें तो यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर आतंकी हमला था, जिसमें पांच आतंकियों को मार गिराया गया और इस घटना में निर्दोषों की जान भी चली गई। यह एक गंभीर घटना है और इसे सभ्य समाज पर हमले के तौर पर माना जाना चाहिए। - हाईकोर्ट

यह था मामला

यह हमला 5 जुलाई 2005 सवा नौ बजे हुआ। तब, अयोध्या में राम जन्मभूमि बैरिकेडिंग के बगल स्थित जैन मंदिर के पास खड़ी मार्शल जीप में धमाका हुआ था। इसके बाद एके-47 राइफल, कारतूस और राकेट लॉन्चर जैसे हथियारों से लैस पांच आतंकियों ने राम जन्मभूमि स्थल पर हमला कर दिया था। इस हमले में रमेश कुमार पांडेय और शांति देवी की मौत हो गई थी। हालांकि, सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में पांचों आतंकियों को ढेर कर दिया था। पांच को साजिश रचने और आतंकियों को रसद और सामग्री सहायता देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इनमें से एक मो. अजीज को सुबूतों के अभाव में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रयागराज ने दोषमुक्त कर दिया था। बाकी चार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें