मामला हमीरपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र का है। जिला अदालत में तैनात रहीं महिला सिविल जज ने 2022 में अधिवक्ता मो.हारुन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि हारुन उनकी अदालत के चैंबर मेें ताकझांक करता है। वहीं, जब यमुना तटबंध के पास घूमने जाती हैं तो वह उनका पीछा करता है और फब्तियां कसता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला जज का पीछा करने मेें चार साल की सजा पाए वकील की जमानत मंजूर कर ली। यह आदेश न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की अदालत ने हमीरपुर के अधिवक्ता माे़ हारुन की पुनर्विचार याचिका पर दिया है।
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मामला हमीरपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र का है। जिला अदालत में तैनात रहीं महिला सिविल जज ने 2022 में अधिवक्ता मो.हारुन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि हारुन उनकी अदालत के चैंबर मेें ताकझांक करता है। वहीं, जब यमुना तटबंध के पास घूमने जाती हैं तो वह उनका पीछा करता है और फब्तियां कसता है।
महिला जज की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र ट्रायल कोर्ट में दाखिल किया। ट्रायल कोर्ट ने 2023 में हारुन को दोषी करार देते हुए चार साल कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जेल में बंद है।
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अधिवक्ता ने दलील दी कि याची सक्रिय अधिवक्ता है। उसने छह नवंबर, 2024 तक सुनाई गई सजा का आधा हिस्सा काट लिया है। अभियोजन पक्ष का बयान बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। याची पर महिला जज को कोई आपत्तिजनक कॉल, एसएमएस व व्हाट्सएप मैसेज भेजने का आरोप भी नहीं है।
वहीं, सरकार की ओर से पेश अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि याची पर महिला जज संग दुर्व्यवहार करने का संगीन आरोप है। कोर्ट ने अधिकतम सजा में से आधी भुगत लेने के आधार पर याची वकील की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।