इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ही मुकदमे में समान भूमिका वाले दो आरोपियों के जमानत प्रकरण में अलग-अलग आदेश पारित करने गंभीर टिप्पणी की। साथ ही गाजियाबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडीजे) से स्पष्टीकरण मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ही मुकदमे में समान भूमिका वाले दो आरोपियों के जमानत प्रकरण में अलग-अलग आदेश पारित करने गंभीर टिप्पणी की। साथ ही गाजियाबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडीजे) से स्पष्टीकरण मांगा है।
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कोर्ट ने पूछा है कि जब दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप-परिस्थितियां एक जैसी थीं तो एक की जमानत अर्जी खारिज करने और दूसरे को राहत देने का आधार क्या था। कोर्ट ने सात दिन में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने मोहम्मद रफीक उर्फ रफीकुल इस्लाम की जमानत याचिका पर दिया।
याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी पर घायल नौशाद को चाकू मारने का आरोप है। मेडिकल रिपोर्ट में नौशाद के शरीर पर कुल 10 चोटें हैं जिनमें केवल एक चाकू से लगी है। अधिकांश चोटें साधारण प्रकृति की हैं। किसी भी चोट को गंभीर या जानलेवा नहीं माना गया है।
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याचिका में यह भी कहा गया कि सह-आरोपी अंशु पर दूसरे घायल दीपक को चाकू मारने का आरोप है। इसके बावजूद उसे नौ जून 2026 को ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल गई, जबकि मोहम्मद रफीक की जमानत अर्जी पहले खारिज कर दी गई थी।