साध्वी भगवती ने कहा- भारत की सनातन संस्कृति सबसे उत्तम
डॉ साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज हम सभी को यह दिव्य अवसर प्राप्त हुआ है। हमें भक्ति की शक्ति में डुबकी लगाने का अवसर प्राप्त हो रहा है। साध्वी जी ने कहा कि अमेरिका ने मुझे जीवन दिया लेकिन भारत ने मुझे जान दी। गुरु कृपा से मैं भारत में रहती हूं, परन्तु अब मुझे ऐसा लगता है कि अब भारत मुझ में रहता है। हनुमान जी मेरी प्रेरणा हैं। वे मेरे ईष्ट देवता हैं। हमें अपने जीवन में बड़ा नहीं बल्कि बढ़िया बनना चाहिए। भारत की सनातन संस्कृति और गुरु परंपरा ही सबसे बढ़िया है। उन्होंने कहा कि आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन संस्कृति को पूरे विश्व के प्रचारित व प्रसारित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है।
रामायण में भगवान श्रीराम का किरदान निभाने वाले सांसद अरुण गोविल ने कहा कि महाकुंभ पवित्रता का महोत्सव है। महाकुंभ जैसी पवित्रता कहीं भी नहीं देखी। महाकुंभ एकता, दिव्यता और समरसता का महोत्सव है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य बागेश्वर जी के पावन सान्निध्य में हनुमत कथा में आकर ऐसा लग रहा है जैसे यही धरती पर स्वर्ग है।
स्वामी चिदानंद बोले- सेवा के लिए ही हुआ हनुमानजी का अवतार
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि महाबली हनुमान जी अपने लिए नहीं जिये, अपने लिए कुछ भी तो नहीं किया उन्होंने सब कुछ प्रभु के लिए और जो भी है वह सब भी प्रभु का इस भाव से जो किया। वह भी सब प्रभु को ही समर्पित कर दिया। तेरा तुझको सौंपते क्या लागत है मोर। समाज को जरूरत है ऐसे ही विचारों की, जहां ’राम काज कीन्हें बिना, मोहि कहां विश्राम।’ जब तक राम काज; सेवा कार्य पूर्ण न हो विश्राम कहाँ, सुख कहाँ, चैन कहा। कहा कि श्री हनुमन जी सभी के ऊपर ऐसी कृपा करें की जीवन में न अहम रहे, न वहम रहे, बस ’सेवा, समर्पण एवं त्याग से युक्त यह जीवन प्रभु को अर्पित हो और हम सब भी सादगी, सरलता और हनुमान जी जैसी उदारता के साथ समाज और समष्टि की सेवा में अपने को समर्पित करें यही तो है जीवन का सार और यही महाकुंभ में हो रही हनुमत कथा का संदेेश भी है। सेवा व समर्पण के माध्यम से ही हनुमान जी का सभी के हृदय में अवतरण हो। इसके पूर्व साध्वी भगवती सरस्वती जी और आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने दीप प्रज्वलित कर दिव्य हनुमत कथा का शुभारम्भ किया।