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पुरस्कारों से भरी इलाहाबाद की झोली

Wed, 11 Feb 2015 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से बुधवार को घोषित विश्व भारती समेत कई पुरस्कार इलाहाबाद की झोली में भी आए हैं। अब भी सक्रिय लेखन से जुड़े प्रतिष्ठित विश्व भारती पुरस्कार के लिए नामित 94 वर्षीय प्रोफेसर आद्या प्रसाद मिश्र ने पुरस्कार पर खुशी तो जाहिर की लेकिन देरी से मिलने केलिए मलाल भी है। अब से पहले उन्हें पद्मश्री, महर्षि वेदव्यास, वाल्मिकि, विशिष्ट विद्वान, राष्ट्रपति पदक आदि सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर यहीं प्रवक्ता, रीडर फिर प्रोफेसर रहे प्रोफेसर आद्या संस्कृत विभाग के अध्यक्ष, डीन, प्रतिकुलपति के बाद कुलपति भी बने। उनके शिष्य और विभाग में ही शिक्षक प्रोफेसर एसडी  द्विवेदी के मुताबिक सांख्य पर ‘तत्व कौमुदि प्रभाव’, सांख्य शास्त्र का इतिहास समेत कई ग्रंथ मानक के रूप में हैं। ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ में उन्होंने भगवान विष्णु के हजार नाम की अद्भुत व्याख्या की है। प्रोफेसर मिश्रा के बेटे सत्यव्रत ने बताया कि वर्ष 2013 में प्रकाशित अभिज्ञान शाकुंतलम के बाद ‘लोक प्रचलित शब्दों के संस्कृत पर्याय’ और महाकाव्य ‘बलिवामनियम’ प्रकाशन के लिए तैयार है।

विश्व भारती सम्मान से ही नवाजे गए प्रोफेसर किशोर नाथ झा चंद्रशेखर आजाद पार्क स्थित केंद्रीय संस्कृत विद्यापीठ के गंगानाथ झा परिसर के प्राचार्य रहे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ.रामसेवक दुबे कहते हैं, प्रोफेसर झा न्याय दर्शन के प्रख्यात विद्वान हैं। उन्होंने इसमें कई रचनाएं की। इसी क्रम में गंगानाथ झा परिसर के ही प्राचार्य डॉ.सर्वनारायण झा को 2011 तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर हरिदत्त शर्मा को भी वर्ष 2012 के विशिष्ट पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। इससे पहले प्रोफेसर शर्मा को साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
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