संस्था बैकस्टेज के ‘शब्द पर्व’ के तहत रविवार को कवि बद्री नारायण ने एकल काव्य पाठ किया। गहरी मार्मिक संवेदना और सामाजिक राजनीतिक चेतना से लैस कविताएं सुनाते हुए वह समय और समाज की नब्ज टटोलते रहे। प्रतिरोध के स्वर मुखर करते बद्री नारायण ने आरंभ से लेकर अब तक की अनेक चुनिंदा कविताएं सुनाईं।
इस दौरान उन्होंने काव्य पाठ पर तीन बार विराम लगाने की कोशिश की पर महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के विस्तार केंद्र के सत्यप्रकाश मिश्र सभागार में जुटे रचनाप्रेमियों ने उनसे फिर-फिर आग्रह करते हुए कविताएं सुनीं। इस विस्तार में ‘बैठे हैं हम, गोल में पहाड़ पर, प्रलय केदिनों में सप्तर्षि, मछली और मनु, सब वेद बचाएंगे, कोई नहीं बचाएगा प्रेमपत्र’ जैसी अनेक कविताएं शामिल रहीं।
रचनापाठ के बाद आलोचक अजय तिवारी ने कहा, बद्री नारायण भावमयता और तन्मयता को विस्तार देते हुए उसे उदात्त भूमि तक ले जाते हैं। वहीं आशीष त्रिपाठी ने कहा, बद्री नारायण हार्दिकता और करुणा के कवि हैं। उनकी कविताओं में शिद्दत के साथ लोक मौजूद और निज दोनों मौजूद है। हां, जन प्रतिरोध और इतिहास से बहस करते हुए उनका स्वर रुधा-रुधा सा है। इससे पहले विवेक निराला ने बद्री को नायक कवि की संज्ञा दी। कहा, वह धैर्य के कवि हैं, प्रतिरोध की चेतना उन्हें बड़ा कवि बनाती है। संचालन प्रवीण शेखर और स्वागत सिद्धार्थ पाल, अमर सिंह, अनुज कुमार, अंजल सिंह ने किया। आरंभ में गीतकार नीरज को श्रद्धांजलि दी गई।