सेना ने रक्षा मंत्रालय को भेजा पत्र, कहा- प्रभाव के बल पर नहीं हट पा रहा कब्जा
ऐसा भी नहीं कि इसके लिए इससे पहले कोई प्रयास नहीं किया गया। अफसरों की मानें तो कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन पैरवी और प्रभाव के बल पर इस मामले को रोकवा दिया गया। इससे आयुध भंडार के आसपास अतिक्रमण जस का तस रह गया। सब एरिया और ओडी फोर्ट के अफसरों ने रक्षा संपदा विभाग को एक बार फिर पत्र लिखकर ओडी फोर्ट के आसपास से अतिक्रमण हटवाने का आग्रह किया है, ताकि सैन्य संस्थान की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का व्यवधान पैदा न हो।
इस पत्र में ओडी फोर्ट के आसपास सेना की जमीन पर ईंट-सीमेंट से तेजी से बढ़ रहे पक्के निर्माणों पर चिंता जताई गई है। हालांकि पिछले वर्षों में सेना ने कुछ पक्के अतिक्रमण हटाए भी हैं। तब सेना ने बुलडोजर चलवाकर संगम और आसपास के इलाके में धर्म की आड़ में किए गए कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त करा दिया था, लेकिन, बेनी बांध से लेकर, बड़े हनुमान मंदिर और अक्षयवट मार्ग तक अभी भी बड़े पैमाने पर कब्जा बना हुआ है।
छह साल से अतिक्रमण हटाने के लिए जूझ रहे अफसर, नतीजा सिफर
किले में सेना के आयुध भंडार से लगे प्रतिबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए पिछले छह वर्षों से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन, रसूख और राजनीतिक दबाव के आगे नतीजा सिफर ही रहा है। कहा जा रहा है कि ऐसे में आयुध डिपो की सुरक्षा की अनदेखी किसी भी समय खतरे की घंटी साबित हो सकती है। वर्ष 2016 से ही ओडी फोर्ट के अफसर रक्षा संपदा विभाग से पत्राचार कर रहे हैं। सेना अतिक्रमण के खिलाफ तत्काल कार्रवाई को लेकर हमेशा गंभीर रही है। ओडी फोर्ट के अफसर चाहते हैं कि जितनी जल्दी हो सके, किले के आसपास से अतिक्रमण हटवा दिया जाए। साथ ही अवैध निर्माणों को बुलडोजर चलाकर मुक्त करा लिया जाए।
पैमाइश में सेना की जमीन पर पाया गया हनुमान मंदिर प्रबंधन का कब्जा
सेना के अनुरोध पर हाल में प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से कराई गई पैमाइश में संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर की भूमि पर बड़े हनुमान मंदिर प्रबंधन का कब्जा पाया गया है। प्राधिकरण ने इसकी पैमाइश कराने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी है। इससे रक्षा मंत्रालय को भी अवगत कराया गया है।