Prayagraj News : संगम तट पर लेटे हनुमानजी।
- फोटो : अमर उजाला
मेलाधिकारी ने तलब की निर्माण स्थिति की रिपोर्ट
इसके साथ ही मेलाधिकारी ने बड़े हनुमान मंदिर परिसर में मंदिर के गर्भगृह के अलावा दुकानों, भवनों, अन्य मंदिरों के साथ रैंप और आसपास किए गए निर्माणों की स्थिति की भी रिपोर्ट तलब की। एसडीएम के साथ राजस्व निरीक्षक शिव शंकर पटेल, लेखपाल रमेश चंद्र ओझा और अमीन पंकज कुमार ने बड़े हनुमान मंदिर परिसर की नापी कराई। साथ ही उस रकबे का राजस्व अभिलेखों में खसरा-खतौनी से भी मिलान कराया गया।
इस दौरान पता चला कि वह पूरी जमीन सेना की है। इसके बाद एसडीएम कर्मवीर की रिपोर्ट पर मेला प्राधिकरण ने उस भूमि को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला बताते हुए लीज पर आवंटित करने से इंकार कर दिया। एसडीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वह भूमि सेना की है और वह लीज पर आवंटित नहीं की जा सकती।
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जोधाबाई अकबर ने पट्टे पर दी थी तीन बिस्वा भूमि
मेला प्राधिकरण की ओर से पैमाइश के दौरान मंदिर प्रबंधन ने अपना पक्ष भी रखा। मंदिर के प्रबंधन से जुड़े लोगों ने राजस्व कर्मियों को बताया कि जोधाबाई अकबर ने कभी बड़े हनुमान मंदिर के लिए तीन बिस्वा भूमि पट्टे पर दी थी। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि इसका रिकार्ड भी उनके पास है।
पीडीए की पैमाइश में भी पाया जा चुका है अवैध निर्माण
ओडी फोर्ट के पास से अवैध कब्जा हटाने संबंधी सेना के नोटिस पर राहत के लिए हनुमान मंदिर प्रबंधन इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी गुहार लगा चुका है। तीन वर्ष पहले तब हाईकोर्ट के आदेश पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने भी मंदिर क्षेत्र की पैमाइश कराई थी। उस समय भी नापजोख में पता चला था कि मंदिर के लिए आवंटित 4335 वर्ग फीट भूमि से अधिक रकबा पर मंदिर और दुकानों के अलावा अन्य कई निर्माण कर लिए गए हैं। कोर्ट के आदेश पर एडवोकेट कमिश्नर ने मौके का निरीक्षण कर नक्शा सहित रिपोर्ट दी थी। इस पर भी हाईकोर्ट कह चुका है कि जितनी जमीन मंदिर के नाम दर्ज है। उतने में ही महंत का अधिकार है। इसके अलावा किया गया निर्माण हटाया जाए।