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बाबू बनने के लिए लाइन में खड़े जेआरएफ, नेट

Sat, 20 Dec 2014 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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देश में गुणवत्तापरक शिक्षा और रिसर्च सभी की चिंता है। इसके बावजूद यूजीसी की जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) और राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) क्वालीफाई करने वाले छात्र-छात्राएं निराशा में हैं। इलाहाबाद में ही अकेले हर वर्ष पांच सौ से अधिक जेआरएफ और तीन हजार से ज्यादा नेट क्वालीफाई करते हैं। इस वर्ष तो जून की परीक्षा में ही 653 जेआरएफ हुए हैं। इसके विपरीत स्थिति यह है कि जेआरएफ अभ्यर्थियों का भी डीफिल / पीएचडी में एडमिशन नहीं हो पा रहा है। ज्यादातर विश्वविद्यालय और कालेजों में लंबे समय से पीएचडी में दाखिला बंद है। जहां हो रहा है वहां भी शिक्षकों की कमी की वजह से गिनती के विद्यार्थियों को दाखिला मिल पा रहा है। आलम यह है कि जेआरएफ और नेट क्वालीफाई अभ्यर्थी भी किसी विभाग में बाबू बनने के लिए लाइन में खड़े हैं लेकिन भर्ती परीक्षाओं में धांधली की शिकायतों के बीच उन्हें वहां भी निराशा मिल रही है।
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प्रतीक यादव, रोहित सोलंकी जून-2012 परीक्षा के जेआरएफ हैं लेकिन शोध पाठ्यक्रम में उन्हें अब तक दाखिला नहीं मिला है। इन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग समीक्षा अधिकारी / सहायक समीक्षा अधिकारी, राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा के लिए बकायदा कोचिंग की और अब समूह-ग की तैयारी भी करेंगे। जून-2012 की ही नेट तनया, अलका आदि का भी यही दर्द है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र शैलेंद्र सिंह ने मध्य प्रदेश के एक विश्वविद्यालय में दाखिला लिया है, तो प्रचंड सिंह एक प्राइवेट संस्थान से पीएचडी करने की तैयारी में हैं। सभी का कहना है कि  उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अलावा बीएचयू सहित कई विश्वविद्यालयों का भी फार्म भरा लेकिन दाखिला नहीं मिला। प्रतीक और रोहित की फेलोशिप की अवधि भी खत्म हो गई। यही दर्द तमाम छात्र-छात्राओं का है। अकेले इलाहाबाद में पांच हजार से अधिक जेआरएफ और नेट हैं जो पीएचडी में दाखिले के लिए भटक रहे हैं।  इलाहाबाद विश्वविद्यालय की संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट-2014) के तहत 300 सीट के लिए 678 जेआरएफ अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। इनके अलावा 664 नेट हैं। यानी, सभी सीट पर जेआरएफ को दाखिला दे दिया जाए तब भी आधे से अधिक वंचित रह जाएंगे। नेट क्वालीफाई तथा अन्य तो कहीं ठहरते ही नहीं हैं।
 जून-2014 के रिजल्ट में जेआरएफ-नेट क्वालीफाई करने के मामले में सभी रिकार्ड टूट गए। इलाहाबाद केंद्र पर परीक्षा देने वाले 3573 सफल अभ्यर्थियों में से 653 तो जेआरएफ हैं। 2920 अभ्यर्थियों ने नेट क्वालीफाई किया है। इतनी संख्या में तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय और जिले के सभी कालेजों में शिक्षक नहीं हैं।  ज्यादातर राज्य विश्वविद्यालय और कालेजों में तीन वर्ष से दाखिले की प्रक्रिया ठप है। राज्य विश्वविद्यालय में पीएचडी पाठ्यक्रम में दाखिला के लिए तीन वर्ष पहले प्रदेश स्तर पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी। उसकी वैधता दो वर्ष के लिए थी लेकिन दो-तीन विश्वविद्यालयों को छोड़कर अन्य में दाखिला बंद है। अब उस परीक्षा का भी कोई मतलब भी नहीं रह गया है।
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