अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के मामले में सीबीआई कोर्ट द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, डा. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार आदि के बरी होने पर पार्टी नेताओं ने खुशी जाहिर की है। हालांकि पार्टी के पुराने नेताओं को इस बात भी मलाल है कि यह फैसला स्वर्गीय अशोक सिंहल के जीते जी नहीं आया। फैसला आने के बाद अयोध्या आंदोलन को याद करने के साथ ही पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर अशोक सिंहल के जीते जी यह निर्णय आता तो ज्यादा खुशी मिलती।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं डा. मुरली मनोहर जोशी के करीबी रहे 86 वर्ष के राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि यह निर्णय आने के बाद जेहन में 28 वर्ष पुरानी यादें एक बार फिर से ताजा हो गई। उन्होंने कहा कि तब डा. जोशी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। डा. जोशी ने कहा था कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों से जुड़े जो भी कार्य हों, वह सब आपको ही करने हैं। तब मुझे उनके रहने की व्यवस्था खाने की व्यवस्था तथा जो भी जेल में बंद होते थे, उनको छुड़ाने आदि दायित्व का मिला था।
एंग्लो बंगाली के शिक्षक रवींद्र मिश्र उस समय कारसेवकों के लिए केशव नगर क्षेत्र से रोटी इकट्ठा कर उसे संघ कार्यालय तथा रेलवे स्टेशन ले जाकर कारसेवकों को सौंपते। पूर्व पार्षद रघुराज किशोर मिश्रा दक्षिण भारत से आने वाले कारसेवकों के साथ गाइड की भूमिका में थे, क्योंकि वहां के कारसेवकों को हिंदी नहीं आती थी। भाजपा पार्षद पवन श्रीवास्तव ने बताया कि छह दिसंबर की शाम को सूचना मिली कि विवादित ढांचा विध्वंस हो गया है।
प्रशासन की सख्ती के बावजूद आम जनता में तब जबरदस्त उत्साह था। शहर में एहतियातन कर्फ्यू लगाया गया था। विहिप के पूर्व प्रांत मीडिया प्रभारी अजीत श्रीवास्तव और विभाग संगठन मंत्री अमित पाठक ने बताया कि विध्वंस की सूचना आने के बाद लोगों में खुशी का माहौल था। ज्यादातर लोग इस घटना को राष्ट्रीय स्वाभिमान को बचाने के लिए आवश्यक बताते रहे। तब पूरा वातावरण राममय था।