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धूमिल न होने दें धरोहर

Mon, 18 Apr 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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धरोहर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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किसी भी जगह और शहर की विरासत उसके माथे पर नगीने की तरह है, जिससे उसकी पहचान जुड़ी होती है। यह पहचान ही उसे उसके गौरव से जोड़ते हुए खास बनाती है। बावजूद इसके हम अपनी विरासत के प्रति सजग नहीं हैं। दुर्भाग्यपूर्ण तो यह कि जिन युवाओं पर उसे सहेजने, संवारने की जिम्मेदारी है, वही उसकी दीवारों पर खुरच-खुरच कर अपने प्रेम की निशानियां दर्ज कर रहे हैं। हालांकि थोड़ी जागरुकता से इसमें कमी आई है, बावजूद इसके दीवारों के सीने पर दर्ज इबारतें अपने साथ हुई छेड़छाड़ की कहानी बखूबी बयां करती हैं।
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चंद्रशेखर आजाद पार्क स्थित महारानी विक्टोरिया की स्मृति में वर्ष 1905 में संगमरमर से बने विक्टोरिया मेमोरियल को नुकसान पहुंचाने में लोगों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। प्रेमी जोड़ों ने गुंबदों पर खुरच-खुरच कर अपने नाम उकेरे हैं। ऐसे ही खुसरोबाग स्थित शहजादे खुसरो, उनकी मां शाह बेगम, बहन निसार बेगम और तमोलिन के सैकड़ों वर्ष पुराने मकबरे भी लोगों की असंवेदनशीलता का शिकार रहे।
यही हाल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग, विजयनगरम हॉल समेत ऐतिहासिक महत्व की अन्य इमारतों का है जिन पर युवाओं ने अपनी प्रेम कहानी, नाम और फोन नंबर तक दर्ज कर दिए हैं। दरभंगा कौसिल सहित पुरातात्विक महत्व की अनेक इमारतों को भी क्षति पहुंचाई गई है। वस्तुत: ये उदाहरण तो विरासतों को इस तरह से नुकसान पहुंचाने की  बानगी भर है। यह हाल तब है जब विरासतों के संरक्षण को लेकर उनके करीब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की ओर से सख्त निर्देश लिखे हुए हैं। प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर हर्ष कुमार कहते हैं, जिन्हें अपने अतीत से लगाव नहीं है, वही उन्हें नष्ट कर रहे हैं। संस्कृति के संरक्षण के लिए जुड़ाव और जागरुकता जरूरी है।
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विरासतों के संरक्षण के लिए विभाग की कोशिशें जारी हैं लेकिन लोगों के सहयोग के लिए इनका संरक्षण संभव नहीं है। अपने शहर की समृद्ध विरासत को सहेजने के लिए लोगों का सजग होना और भावनात्मक रूप से जुड़ना बेहद जरूरी है।
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0 एसी त्रिपाठी
संरक्षण सहायक, एएसआई
00 हाल-ए-विरासत

0 दीवारों, गुंबदों पर युवा लिख रखे अपने नाम, मोबाइल नंबर
0 घूमने-फिरने आने वाले लोग खाने-पीने की चीजें, रैपर छोड़कर चले जाते हैं
0 ऐसी जगहों पर लगे पेड़ों पर खुरच-खुरच कर लिखे गए हैं नाम
0 कई जगहों पर दीवारों के बीच पान की पीक से कर देते हैं गंदा

00 नायाब विरासत
0 खुसरोबाग
(चार मकबरे)
0 विक्टोरिया मेमोरियल
0 गोरा कब्रिस्तान
0 ओल्ड फोर्ट में जनाना महल
0 अशोक स्तंभ
0 सूर्य भीटा
0 गिंजा हिल्स
0 आल्हा उदल की बैठक
0 समुद्र कूप
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