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ऑटा ने दी हड़ताल की चेतावनी

Sun, 09 Jul 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो.केएस मिश्र पर शुक्रवार को हुए हमले की घटना ने तूल पकड़ लिया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि हमलावरों पर सिर्फ एफआईआर दर्ज कर लेना काफी नहीं है। अगर जिला प्रशासन दो दिनों के भीतर गिरफ्तारी नहीं करता है तो शिक्षक बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति बनाएंगे और जरूरत पड़ी तो हड़ताल भी करेंगे।
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विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में शनिवार को ऑटा के बैनर तले प्रो.एआर सिद्दीकी, प्रो.आरकेपी सिंह, प्रो.एनके शुक्ला, प्रो.अनुपम दीक्षित, प्रो.सूर्य नारायण, प्रो.एचएस उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय में जो माहौल है, उसमें काम कर पाना मुश्किल हो गया है। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार इतनी शर्मनाक घटना हुई। प्रो. केएस मिश्र भले ही कार्यवाहक कुलपति रहे हों, लेकिन वह कुलपति की सीट पर बैठे थे। ऐसे में उन पर हमला, कुलपति पर हमला है। ऑटा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अराजकता को बढ़ावा देने में अगर किसी शिक्षक का हाथ है तो इसकी भी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने पूर्व में हुए शिक्षकों पर हमले का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि ऐसे तमाम मामलों में एफआईआर तो दर्ज की गई लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस ने कोई कारगर कार्रवाई नहीं की। प्रशासन को दो दिन का वक्त दिया जाता है। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षक आंदोलन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रसंघ का यही स्वरूप रहा तो विश्वविद्यालय की हालत ठीक नहीं होगी। शिक्षकों ने इलाहाबाद में अपने छात्र जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि वह भी विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रॉक्टर, डीएसडब्ल्यू, रजिस्ट्रार का घेराव किया करते थे, ज्ञापन देते थे लेकिन शिक्षकों पर कभी हमला नहीं होता था। शिक्षकों ने यह सुझाव भी दिया कि अराजकता फैलाने वाले छात्रों की अगर डिग्री वापस लेने की कार्रवाई शुरू हो जाए तो ऐसी घटनाओं पर कुछ हद तक रोक लग सकती है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति एवं डीन आर्ट्स प्रो.केएस मिश्र पर हमले की घटना के बाद ऑटा हरकत में आया तो छात्रों ने भी डीन आर्ट्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्रों ने एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया से कार्यवाहक वीसी की शिकायत की है। छात्रों का आरोप है कि डीन आर्ट्स ने कला संकाय के प्रतिनिधि चंद्रशेखर चौधरी के लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके विरोध में छात्रों ने शनिवार को विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस के गेट पर धरना-प्रदर्शन भी किया।

छात्रों का कहना है कि रामशंकर कठेरिया ने पूरे मामले की शिकायत ईमेल के जरिए लिखित रूप से भेजने को कहा है। छात्रों का कहना है कि एक तरफ छात्रसंघ उपाध्यक्ष बेहोश पड़े थे तो दूसरी ओर डीन आर्ट्स छात्रों से ज्ञापन लेने को तैयार नहीं थे। जिस प्रोफेसर के अंदर संवेदना हो, उसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में रहने का कोई अधिकार नहीं। प्रदर्शन के दौरान निलंबित किए गए छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा और चंद्राशेखर चौधरी ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो आत्मदाह करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। प्रदर्शन में छात्र नेता विवेकानंद पाठक, विक्रांत सिंह, आनंद सिंह, अंकुश यादव, हरीनाम सिंह, अवनीश विद्यार्थी, नीरज सिंह, उदय यादव, अवनीश यादव आदि मौजूद रहे।

अल्लापुर, चांदपुर सलोरी, बघाड़ समेत अन्य डेलीगेसी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर के आसपास शनिवार को जगह-जगह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के खिलाफ दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर दिए गए। पोस्टर पर कुलपति की फोटो है और उस पर देशद्रोही लिखा हुआ है। साथ ही भारतीय सेना पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखी हुई हैं और दावा किया गया है कि यह टिप्पणियां कुलपति ने की हैं। अंत में लिखा है कि पोस्टर इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र कल्याण समिति की ओर से लगाया गया है।
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