नौ अगस्त 1942 यानी अगस्त क्रांति की शुरुआत। कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो चुकी थी। बम्बई अधिवेशन से इलाहाबाद लौट रहे कांग्रेस के युवा नेता लाल बहादुर शास्त्री और कमलापति त्रिपाठी को शहर से पहले छिवकी स्टेशन पर लोगों ने उतार लिया। शाहिद फाखरी, फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, सालिकराम जायसवाल, एचएन बहुगुणा सहित कई नेता भूमिगत हो गए और शाम होते ही इविवि के छात्रों ने विशाल मशाल जुलूस निकाल अगस्त क्रांति को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का उद्घोष किया।
जुलूस का नेतृत्व विश्वविद्यालय यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष कमलेश मल्ल और छात्र नेता यदुवीर सिंह कर रहे थे। जुलूस सिविल लाइंस से होते हुए पीडी टंडन पार्क पहुंचा। जुलूस में कांग्रेस का कोई नेता नहीं था और न ही पहले से कोई कार्यक्रम निर्धारित था। ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ जैसे गगनभेदी नारों के साथ जुलूस शहर की घनी बस्तियों में पहुंचा। पीडी टंडन पार्क में सभा हुई, जिसकी कमान विश्वविद्यालय के छात्रों ने संभाली। छात्र नेताओं ने जनता से क्रांतिकारी संघर्ष शुुरू करने का आह्वान किया। संपूर्ण छात्र समुदाय ने सहयोग का आश्वासन दिया।