इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती के लिए नए सिरे से विज्ञापन निकाला जाएगा। कार्यपरिषद की शनिवार को हुई बैठक में पुराने विज्ञापन के खाली रह तथा पिछले तीन साल में रिक्त हए पदों के लिए नए सिरे से विज्ञापन निकालने का निर्णय लिया गया। इसके लिए सभी को नए सिरे से आवेदन करना होगा। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 500 से अधिक पदों के लिए 25 अक्तूबर से पहले विज्ञापन निकालने की तैयारी है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन साथ भरे हुए फार्म तथा अन्य सभी डाक्यूमेंट की हार्ड कॉपी भी जमा करनी होगी।
विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 508 पदों के लिए फरवरी-2012 में नोटिफिकेशन हुआ था। उसमें कुछ विभागों के लिए ही सेलेक्शन कमेटी हो पाई थी। इनमें भी पांच विभागों का लिफाफा विवादों की वजह से नहीं खुल पाया और आगे की भर्ती प्रक्रिया भी रुक गई। ऐसे में तीन साल से भी अधिक अवधि बीतने के बाद कार्यपरिषद ने नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया।
इससे पहले 2006 और फिर 2008 में भी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी बीच में रुक गई थी। उनमें खाली रह गई सीटों को मिलाकर 2012 में नए सिरे से विज्ञापन निकाला गया था। इसी तरह से नए विज्ञापन में भी 2012 के विज्ञापन के रिक्त तथा इस दौरान रिटायर शिक्षकों से खाली हुए पद शामिल किए जाएंगे। 2012 की भर्ती के आवेदकों को भी नए सिरे से आवेदन करना होगा। कुलपति प्रोफेसर ए.सत्यनारायण ने बताया कि 25 अक्तूबर से पहले विज्ञापन निकाले जाने की तैयारी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी इससे सूचित कर दिया गया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विज्ञापन-2012 के तहत कॉमर्स, बॉटनी, पर्यावरण विज्ञान, डिफेंस स्टडीज और अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंस विभागों में शिक्षकों की भर्ती के लिए सेलेक्शन कमेटी हो गई थी। परिणाम का लिफाफा कार्यपरिषद में भी रख दिया गया था, लेकिन एक्सपर्ट के पैनल को लेकर सदस्यों ने विरोध जताया। आरोप है कि दूसरे विषय के शिक्षकों को एक्सपर्ट बना दिया गया। इसकी वजह से संबंधित विभागों के अलावा अन्य विषयों के शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी बाधित हो गई। कार्यपरिषद की शनिवार को हुई बैठक में इन पांच विभागों का मामला विजिटर (राष्ट्रपति) के पास भेजने का निर्णय लिया गया।
कार्यपरिषद की बैठक में कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत शिक्षकों के प्रमोशन का लिफाफा भी खुला। 11 शिक्षकों को प्रोफेसर तथा एक को एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत करने का निर्णय लिया गया। रसायन विज्ञान विभाग के डॉ.आरकेपी सिंह, डॉ.गीता वातल, डॉ.कृष्णा श्रीवास्तव, डॉ.पीके टंडन, डॉ.आईआर सिद्दीकी, डॉ.दिनेश मणि, डॉ.आरके सिंह, डॉ.आरके दुबे और डॉ.वंदना सिंह प्रोफेसर हो गए। इनके अलावा गृह विज्ञान की डॉ.संगीता श्रीवास्तव और जंतु विज्ञान के डॉ.बी.मोहंती प्रोफेसर बनाए गए हैं। जंतु विज्ञान के ही डॉ.केपी सिंह का एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन हुआ है।
एक साल के अंतराल के बाद ही विश्वविद्यालय के छात्रावासों में दाखिले की प्रक्रिया बदल दी गई। नई व्यवस्था के तहत एक बार फिर दाखिले की प्रक्रिया केंद्रीयकृत कर दी गई है। पिछले वर्ष भी केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत डीएसडब्ल्यू कार्यालय से हॉस्टल एलाट किए गए थे, लेकिन इस बार इसमें बदलाव कर दिया गया। इस साल हॉस्टलों के स्तर पर प्रवेश हुआ, लेकिन इसमें कई तरह की खामियां सामने आईं हैं। इसकी वजह से पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल करने का निर्णय लिया गया। कार्यपरिषद की शनिवार को हुई बैठक में भी इस पर मुहर लग गई।