इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह और महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू ने कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू पर आंदोलन से हटने के लिए प्रलोभन तथा धमकी देने जैसे गंभीर लगाए हैं। उनका कहना है कि कुलपति, प्रॉक्टर और ओएसडी ने माफीनामा पर उनसे जबरदस्ती हस्ताक्षर कराया और विश्वविद्यालय परिसर छोड़कर भाग जाने के लिए कहा। छात्र नेताओं इसकी शिकायत डीएम और एसएसपी के अलावा राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, एमएचआरडी मंत्री, मुख्यमंत्री आदि से भी की है। हालांकि, कुलपति और चीफ प्रॉक्टर ने छात्रसंघ पदाधिकारियों के आरोपों को खारिज कर दिया है।
वार्ता के बाद लौटे छात्रसंघ पदाधिकारियों का कहना था कि चीफ प्रॉक्टर और ओएसडी के बुलावे पर वे कुलपति ऑफिस में पहुंचे थे। वहां आचार्य शांतनु पहले से मौजूद रहे। वहां उनसे पहले से तैयार माफीनामा पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराया गया। माफीनामा अंग्रेजी में है। उसमें लिखा गया है कि छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा ने व्यक्तिगत तथा राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें गुमराह किया। माफीनामा में सिद्धार्थ सिंह को छात्रसंघ का संयुक्त सचिव बताया गया है, जबकि वह महामंत्री हैं। दोनों छात्र नेताओं का कहना है कि प्रलोभन इंकार करने पर उन्हें कॅरियर बर्बाद करने की धमकी दी गई। छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा का कहना है कि कुलपति की ओर से उन्हें लगातार परेशान किया गया है। इस माफीनामा में भी उन्हें ही टारगेट किया गया। ऋचा ने आंदोलन तोड़ने का भी आरोप लगाया।
‘छात्रों का आरोप निराधार है। दोनों पदाधिकारी खुद मिलने आए थे। वे माफी मांगना चाहते थे। उन्होंने माफीनामा दिया भी। उनसे कोई वार्ता नहीं हुई। अब वे बाहर क्या और क्यों कह रहे हैं वे ही जानें। उन्होंने अनशन शुरू किया है। इसे बारे में कुछ नहीं किया जा सकता।’
प्रोफेसर रतनलाल हांगलू, कुलपति