पुलिस का खेल देखिए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विपुल वार्ष्णेय 70 वर्षीय मां को लेकर दौड़ते रहे। खुद की 16 बीघे जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग किए जाने पर अतीक अहमद के गुर्गों पर कार्रवाई की गुहार लगाते रहे। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उल्टा चौकी व थाने की पुलिस उन्हें टरकाती रही। थककर उन्होंने शिकायत की तो विकास प्राधिकरण ने जांच कराई। आरोप सही मिलने पर दो दबंगों पर अवैध प्लाटिंग समेत अन्य मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराई।
ऊषा वार्ष्णेय 70 पत्नी स्व. सुरेश चंद्र कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली हैं। जिनकी कृषि योज्य 16 बीघा भूमि बम्हरौली जीटी रोड पर है। उनके बेटे विपुल इविवि में प्रोफेसर हैं। आरोप है कि उनकी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जाकर हरे पेड़ों को कटवाकर अतीक अहमद के गुर्गे अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं। इसकी शिकायत उन्होंने चौकी व थाने में कई बार की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
उल्टा उन्हें हर बार टरका दिया गया। 112 व ऑनलाइन एफआईआर पर भी सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने शिकायत प्रयागराज विकास प्राधिकरण में की। अफसरों ने इसकी जांच कराई। क्षेत्रीय अवर अभियंता अश्वनी कुमार मिश्रा ने जांच में पाया कि बिना पीडीए से नक्शा पास कराए अवैध प्लाटिंग के उद्देश्य से सड़क का डिमार्केशन व ईंटें डालकर पाइलिंग कराई जा रही है। मौके पर जाहिद अहमद व नूर हमजा निवासी बम्हरौली मिले। जिसके बाद उनकी तहरीर पर धूमनगंज थाने में दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
अतीक के करीबियों संग रह चुका है नामजद
सूत्रों का कहना है कि मामले का एक आरोपी नूर हमजा अतीक गिरोह का सदस्य हैं। दो साल पहले करेली में दर्ज अवैध प्लाटिंग के मामले में वह अतीक के बेहद करीबियों इमरान जई, जुबैर, कम्मो-जाबिर व जैद खालिद संग नामजद हुआ था। खास बात यह कि जैद खालिद ने ही बाद में अतीक व इमरान समेत अन्य पर खुद को देवरिया जेल में ले जाकर पीटने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था।
शिकायत पर जांच कराई गई जिसमें अवैध प्लाटिंग की बात सही पाई गई। मामले में दो लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
सत शुक्ला, जोनल अफसर पीडीए
थाने ने दी थी रिपोर्ट, भूमि पर नहीं हो रहा है कोई काम
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रकरण में जांच कराने पर धूमनगंज इंस्पेक्टर की ओर से मौके पर कोई काम न होने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, दो दिन पहले सीओ सिविल लाइंस की ओर से डीआईजी को भेजी गई रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया था। बता दें कि भुक्तभोगी की आईजीआरएस शिकायत पर आख्या मांगे जाने पर सीओ की ओर से धूमनगंज इंस्पेक्टर से जांच कराई गई थी।