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Atiq Murder Updates : अतीक और अशरफ की हत्या के बाद तीनों हमलावरों ने किया सरेंडर, पुलिस ने लिया हिरासत में

Sun, 16 Apr 2023 12:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद और उसके भाई पूर्व विधायक अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या करने के बाद गोली मारने वाले बदमाशों ने मौके पर ही हाथ खड़े करके आत्मसमर्पण कर दिया।
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Prayagraj News : अतीक और अशरफ की हत्या। - फोटो : अमर उजाला।
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पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद और उसके भाई पूर्व विधायक अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या करने के बाद गोली मारने वाले बदमाशों ने मौके पर ही हाथ खड़े करके आत्मसमर्पण कर दिया। तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गोलीबारी में अतीक और अशरफ के साथ मौजूद धूमनगंज के सिपाही मान सिंह भी घायल हो गए। हत्या करने वाले युवकों के नाम लवलेश तिवारी, अरुण और सनी बताए गए हैं। इसके अलावा लखनऊ से न्यूज कवरेज के लिए आया एक पत्रकार भी जख्मी हो गया है। गोली मारने वाले युवकों की पहचान भी कर ली गई है। इसमें लवलेश तिवारी बांदा, अरुण मौर्य हमीरपुर और शनी कासगंज का निवासी बताया जा रहा है। 

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अतीक पर दर्ज हो चुके हैं 101 मुकदमे
अतीक के खिलाफ कुल 101 मुकदमे दर्ज हुए। वर्तमान में कोर्ट में 50 मामले चल रहे हैं, जिनमें एनएसए, गैंगस्टर और गुंडा एक्ट के डेढ़ दर्जन से अधिक मुकदमे हैं। उस पर पहला मुकदमा 1979 में दर्ज हुआ था। इसके बाद जुर्म की दुनिया में अतीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हत्या, लूट, रंगदारी अपहरण के न जाने कितने मुकदमे उसके खिलाफ दर्ज होते रहे। मुकदमों के साथ ही उसका राजनीतिक रुतबा भी बढ़ता गया।

एक बार एनएसए भी लगाया जा चुका है
1989 में वह पहली बार विधायक हुआ तो जुर्म की दुनिया में उसका दखल कई जिलों तक हो गया। 1992 में पहली बार उसके गैंग को आईएस 227 के रूप में सूचीबद्ध करते हुए पुलिस ने अतीक को इस गिरोह का सरगना घोषित कर दिया। 1993 में लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड ने अतीक को काफी कुख्यात किया। गैंगस्टर एक्ट के साथ ही उसके खिलाफ कई बार गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी की गई। एक बार तो उस पर एनएसए भी लगाया जा चुका है।

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कई मुकदमों में मुकर गए गवाह
जुर्म और राजनीति के साथ -साथ अतीक अब ठेकेदारी और जमीन के धंधे में भी कूद पड़ा। जमीन की खरीद-फरोख्त और रंगदारी से अतीक ने ही नहीं, बल्कि उसके गुर्गों ने भी अकूत संपत्ति जुटा ली। अतीक का खौफ इतना था कि उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करने की हिम्मत नहीं करता था। अगर कर भी दिया तो बाद में गवाह मुकर जाते। कई मामलों में वादी ने ही लिखकर दे दिया कि उसने अतीक के खिलाफ गलत मुकदमा दर्ज कराया था। यहां तक कि प्रदेश सरकार ने अतीक के खिलाफ कई गंभीर मुकदमों को वर्ष 2001, 2003 और 2004 में वापस ले लिया था। कई मामलों में तो पुलिस ने अतीक की नामजदगी को गलत बता एफआर लगा दी थी।

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