2006 में किया था उमेश पाल का अपहरण
पार्टी ने उसे दोबारा सलाह दी कि अशरफ को चुनाव न लड़ाकर अपनी पत्नी को उतारे लेकिन इस बार भी अतीक नहीं माना। वह अशरफ के नाम पर अड़ गया था। उपचुनाव में जिसमें अशरफ जीत गया था। विधायक बनने का उसका सपना पूरा हुआ लेकिन राजू पाल हत्याकांड ने अतीक परिवार का पीछा नहीं छोड़ा। हत्याकांड के गवाह उमेश पाल का 2006 में अपहरण कर लिया गया।
2007 में जब मायावती सरकार बनी तो अतीक और उसके गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई। पुराने केस फिर खुल गए। उमेश ने भी पांच जुलाई 2007 को अतीक अशरफ समेत 11 के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। पहले अतीक फिर अशरफ को जेल भेजा गया।बाद में राजू पाल हत्याकांड की जांच सीबीआई के पास चली गई लेकिन उमेश अपने अपहरण की प्रभावी पैरवी करते रहे।
24 फरवरी 2023 को अतीक के बेटे असद तथा अन्य शूटरों ने उमेश की भी हत्या कर दी। मंगलवार को अतीक अहमद को जब पहली बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तो कोर्ट के बाहर अतीक के कुछ समर्थकों ने कहा कि भाई अशरफ के दुलार में उसने ऐसा ऐसा निर्णय लिया कि पूरा परिवार तहस नहस हो गया।
दो बेटे जेल में, दो बाल सुधार गृह में एक पांच लाख का इनामी
अतीक के परिवार में पत्नी शाइस्ता के अलावा पांच बेटे और भाई अशरफ है। अशरफ की पत्नी जैनब अपनी बेटी के साथ मायके में रहती है। अतीक का बड़ा उमर लखनऊ जेल में, उससे छोटा अली नैनी जेल में बंद है। असद, उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख का इनामी है। दोनों छोटे बेटे बाल सुधार गृह में हैं। पत्नी शाइस्ता भी उमेश पाल हत्याकांड में 25 हजार की इनामी है।