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अतीक पर और सख्त हुआ हाईकोर्ट

Wed, 01 Mar 2017 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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रोड शो के दौरान अतीक का जगह-जगह हुआ स्वागत - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
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पूर्व सांसद अतीक अहमद के खिलाफ दर्ज मुकदमों और शियाट्स प्रकरण में उनकी भूमिका की जांच को लेकर हाईकोर्ट के तेवर और सख्त हो गए हैं। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने न सिर्फ एसपी क्राइम के तबादले पर नाराजगी जताई, बल्कि अतीक के खिलाफ चल दर्ज दर्जनों मुकदमों में सरकार की पैरवी पर भी सवाल खड़े किए। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसलेे और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने जानना चाहा है कि एसपी क्राइम मो. इरफान अंसारी का तबादला किसके कहने पर हुआ है।
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अपर महाधिवक्ता इमरानउल्लाह ने कोर्ट को बताया कि तबादला निर्वाचन आयोग ने किया है, इसमें प्रदेश सरकार की कोई भूमिका नहीं है। मगर कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं थी। पीठ ने निर्वाचन आयोग का वह आदेश प्रस्तुत करने के लिए कहा, जिसमें एसपी क्र्राइम का तबादला किया है। आदेश की प्रति सरकारी वकील के पास मौजूद नहीं थी। इस पर कोर्ट ने लंच के बाद दो बजे आदेश प्रस्तुत करने के लिए कहा। इसके साथ ही अतीक के खिलाफ अदालत में चल रही आपराधिक मुकदमों की स्थिति भी बताने को कहा।

दो बजे अदालत बैठी तो अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष आईजी प्रशासन का आदेश रखा, जिसमें अधिकारियों के तबादले का निर्देश दिया है। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वह बुधवार को आदेश की प्रति प्रस्तुत करें। पीठ का कहना था कि जब एसपी क्राइम को कोर्ट के आदेश से जांच सौंपी गई थी तो उनका तबादला कैसे किया गया। क्या प्रदेश सरकार ने इसकी संस्तुति की थी और क्या सरकार ने आयोग को कोर्ट के आदेश की जानकारी दी थी।
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पीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि शियाट्स घटना की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें जो लोग असलहे लिए दिखाई दे रहे हैं उनकी शिनाख्त अब तक क्यों नहीं की गई। पुलिस ने अतीक अहमद को रिमांड पर लेकर पूछताछ क्यों नहीं की। पीठ का कहना था कि क्या जांच अधिकारियों को अब यह भी बताना पड़ेगा। नए एसपी क्राइम प्रकाश स्वरूप पांडेय को भी इसके लिए फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा है कि अतीक के शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं ।

अपर महाधिवक्ता ने बताया कि अब तक दो मुकदमों में अतीक की जमानत निरस्त करने की अर्जी दी गई है। अतीक पर 11 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन सभी में वह जमानत पर हैं। इन मुकदमों में ट्रायल चल रहा है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि कितने मुकदमों में गवाह अभियोजन का समर्थन कर रहे हैं और कितने में मुकर गए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस ने पहले ही अतीक की जमानत निरस्त कराई होती तो कई संगीन अपराध होने से बच जाते, क्योंकि अतीक पर हत्या, जानलेवा हमला और अपहरण जैसे संगीन आरोप हैं। हालांकि, किसी भी एक मामले में आज तक सजा नहीं हुई है। जबकि मुकदमे 15 वर्षों से लंबित हैं। इस मामले पर एक मार्च को भी सुनवाई जारी रहेगी।
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