विशिष्ट अतिथि डॉ. एलएस ओझा जी ने कहा अटल के व्यक्तित्व से और उनके जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय ने कहा कि अटल जी अजात शत्रु थे। तत्पश्चात कवि सम्मेलन का शुभारंभ आकांक्षा बुंदेला की वाणी वंदना के साथ हुआ।
गीतकार शैलेंद्र मधुर जी ने जब अपने गीत प्रस्तुत किया तो श्रोतागण झूम उठे। जिसने पिया कई बार गरल, भाषा जिसकी थी बड़ी सरल, है सत्य अटल जी रहे अटल। अभिजीत मिश्रा अकेला,राय बरेली ने अपने काव्य पाठ कर कवि सम्मेलन की शुरुआत की। अटल वही जो कविताओं का उपमेय और अपमान बने। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे योगेश ओझा झमाझम ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सीमा से तिरंगे में लिपट करके जो आए, बोले उनके खून की वो धार वंदे मातरम। गीतकार आनंद श्रीवास्तव ने अपने गीतों से लोगों को आह्लादित किया। मुझको बचपन की कोई फिर से कहा निशानी दे दे। मां के आंचल तलें नींद सुहानी दे दे।
हास्य कवि नजर इलाहाबादी ने अटलजी को समर्पित कविता सुनाई। नमन करी हे अमर अटल जी, पूरा भारत ऋणी तोहार। कवि अमित जौनपुरी ने अटल जी के कविताओं का काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन में राजू पाठक, टीपी सिंह, मनोज कुशवाहा, गिरजेश मिश्र, विजय श्रीवास्तव, आशुतोष दिवेदी, राष्ट्र गौरव, आशुतोष हर्षवर्धन, मनीष केसरवानी, संजय गुप्ता, राजन शुक्ला, रोहित जायसवाल अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।