इलाहाबाद। इलाहाबाद जंक्शन परिसर में शुक्रवार सुबह मिले तबाही के सामान अगर समय रहते जीआरपी ने न बरामद किया होता तो हर तरफ तबाही ही नजर आती। जिस जगह पर विस्फोटक बरामद हुए हैं, उससे यह अंदेशा जताया गया है कि दहशतगर्दों के निशाने पर जंक्शन ही था। शुक्र है कि जीआरपी को इसकी भनक लग गई और अंडर बैरल गन लांचर और सेल बरामद कर लिया गया।
गन लांचर की क्षमता पचास मीटर है। यह गिरने के बाद दस मीटर एरिया के चारों तरफ भारी तबाही मचाता है। बोरी रखने वालों के निशाने पर जंक्शन था। चूंकि स्टेशन के सिटी साइड ज्यादा भीड़ रहती है। इसलिए इसे यहां रखा गया था। अंडर बैरल गन लांचर और सेल मिलने के बाद स्टेशन पर खलबली मच गई। पुलिस की चौकसी भी बढ़ा दी गई। हर यात्री पर निगाह रखी जाने लगी। एटीएस, एसटीएफ और जांच एजेंसियां भी मामले पर नजर रख रही हैं। जंक्शन के चप्पे-चप्पे की गहन छानबीन की गई।
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में इलाहाबाद अतिसंवेदनशील
इलाहाबाद(ब्यूरो)। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में शहर को आतंकी और नक्सली गतिविधियों की नजर से अतिसंवेदनशील बताया है। इसे लेकर एजेंसियों ने स्थानीय प्रशासन को अलर्ट किया कि हाईकोर्ट, इंदिरा भवन, संगम प्लेस, कचहरी, विवि, जंक्शन यह प्रमुख स्थलों को निशाना बना सकते हैं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन इन रिपोर्टों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
लखनऊ में पिछले दिनों एटीएस के हत्थे चढ़ा आईएसआई एजेंट जमालुद्दीन के तार भी इलाहाबाद से जुड़े थे। वह इलाहाबाद में कई तक ठहरा था। उसने कई होटलों में नौकरी की और बैंक में रकम लेनदेन भी किया। कई साल पहले एसटीएफ ने इलाहाबाद में ठहरे तीन दहशतगर्दों को लखनऊ के विभूतिखंड में मार गिराया था। जांच में पता चला था कि ये दहशतगर्दों के निशाने पर रामजन्म भूमि थी। इसके अलावा बनारस में संकटमोचन विस्फोट कांड में पकड़े गए आतंकी वली उल्ला के तार भी इलाहाबाद के फूलपुर से जुड़े थे। वह यहीं का रहने वाला भी था। जांच एजेंसी के मुताबिक संकटमोचन कांड की साजिश करेली के मदरसे में रची गई थी। यहीं पर बम बनाया गया था। लगभग डेढ़ साल पहले भी इलाहाबाद जंक्शन के सिविल लाइंस साइड एक लावारिस बम मिलने की सूचना मिली थी। बम विस्फोट में एक कुत्ते के चीथड़े उड़ गए थे। तत्कालीन एसएसपी ने इस घटना की रिपोर्ट में आतंकी गतिविधियों की आशंका व्यक्त की थी। नक्सली मूवमेंट की कई बड़ी घटनाओं में इलाहाबाद के तार जुड़े होने के साक्ष्य मिल चुके हैं। यमुनापार के कई इलाके नक्सली गतिविधियों के लिहाज से संदिग्ध माने जाते हैं। ऐसे में जंक्शन परिसर में गन लांचर और सेल मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ी है।
आईटीबीपी का चोरी हुआ है यूबीजीएल
इलाहाबाद(ब्यूरो)। जीआरपी ने बताया कि ऐसी सूचना मिल रही है कि छत्तीसगढ़ में रजानंद ग्राम बसौली इलाके के नक्सली मूवमेंट वाले इलाके में आईटीबीपी की एक यूनिट तैनात है। एक अगस्त से 25 अगस्त के बीच आईटीबीपी क ा एक अंडर बैरल गन लांचर और सेल चोरी हुआ है। जिसकी रिपोर्ट स्थानीय थाने में दर्ज है। ऐसी जानकारी मिलने के बाद जीआरपी आईटीबीपी से संपर्क कर पता कर रही है कि कहीं जंक्शन परिसर के पास मिला गन लांचर और सेल आईटीबीपी का तो नहीं है।
शहर में ग्रेने से पहले भी हुए हैं कई हादसे
इलाहाबाद(ब्यूरो)। शहर में हैंड ग्रेनेड के विस्फोट में पहले भी कई जानें जा चुकी हैं। कई साल पहले नींवा इलाके में हैंड ग्रेनेड से पीतल निकालने के चक्कर धमका हुआ था। जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। नींवा इलाके में सेना के जवान फायरिंग का अभ्यास करते हैं। अक्सर हैंड ग्रेनेड नहीं फटता है। फायरिंग रेंज के आसपास कबाड़ बीनने वाले पीतल के चक्कर में जाते थे। एक बार इन कबाड़ियों के हाथ बिना दगा ग्रेनेड लग गया। वे बस्ती में जाकर ग्रेनेड पीटकर पीतल निकालने का प्रयास कर रहे थे, तभी विस्फोट हो गया और चार लोगों जान चली गई थी। 23 मई 2012 क रेली के एक झोपड़ बस्ती में हुए विस्फोट में आठ लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में भी ग्रेनेड विस्फोट की बात सामने आई थी।
स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे से बोरी रखने वाले की तलाश
इलाहाबाद(ब्यूरो)। स्टेशन और उसके आसपास के सरकुलेटिंग एरिया में कुल 51 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जीआरपी और आरपीएफ इन सीसीटीवी कैमरों से बोरी रखने वाले शख्स की तलाश में लगी है। बोरी कितनी देर पहले पेड़ के नीचे रखी गई थी, यह स्पष्ट नहीं है। इसलिए पुलिस फुटेज को रिवर्स कर देख रही है। पुलिस यह मान कर चल रही है कि सीसीटीवी फुटेज में बोरी रखने वाला संदिग्ध जरूर कैद होगा। वहीं घटना के बाद आसपास के होटलों के रजिस्टर को भी पुलिस ने खंगाला।
जंक्शन परिसर में मिले यूबीजीएल और सेल के मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है। पता चल रहा है कि छत्तीसगढ़ में आईटीबीपी की एक यूनिट से कुछ दिन पहले यूबीजीएल और सेल गायब हुए थे। इस मामले की रिपोर्ट स्थानीय थाने में दर्ज है। इस बात की जांच की जा रही है कि यह यूबीजीएल और सेल आईटीबीपी के ही तो नहीं है। साथ ही पता लगाया जा रहा है कि यह यहां तक कैसे पहुंचा और कौन रखकर गया है।
एलवी एंटनी देवकुमार आईजी रेलवे इलाहाबाद।