फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राज्य विवि: रातभर कोतवाली में रहे शिक्षक, सुबह हंगामा

विज्ञापन
ASU - फोटो : CITY DESK
विज्ञापन
राज्य विवि के शिक्षकों के समर्थन में पहुंचे अधिवक्ता
विज्ञापन

अफसरों के गलती मानने के बाद शांत हुआ मामला
प्रयागराज। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में धरने पर बैठे स्ववित्त पोषित शिक्षकों को उठाए जाने के बाद पुलिस ने रात भर उन्हें कोतवाली में बैठाए रखा। सुबह उनके समर्थन में तमाम अधिवक्ता कोतवाली पहुंच गए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला बढ़ने पर सिटी मजिस्ट्रेट ने शिक्षकों और अधिवक्ताओं के समक्ष माना कि पुलिस से गलती हो गई है। इसके बाद मामला शांत हुआ और शाम चार बजे के आसपास शिक्षक एवं अधिवक्ता वहां से हटे।
राज्य विवि में शांतिपूर्वक धरना दे रहे स्ववित्त पोषित शिक्षकों को पुलिस ने बृहस्पतिवार को बलपूर्वक हटा दिया था। धरना स्तर पर रखे तख्त आदि भी जब्त कर लिए थे। शिक्षक नेता ख्वाजा शमशाद और डॉ. दीपक शुक्ला को कोतवाली में रात भर बैठाकर रखा गया। शिक्षक के समर्थन में शुक्रवार सुबह हाईकोर्ट के तमाम अधिवक्ता कोतवाली पहुंच गए। पुलिस ने शिक्षकों से कहा कि मुचलका भरकर जा सकते हैं तो शिक्षकों ने जवाब दिया कि वह कोई अपराधी नहीं हैं। पुलिस को बिना शर्त छोड़ना होगा। हंगामा बढ़ने पर शिक्षकों के साथ अधिवक्ता भी कोतवाली में धरने पर बैठ गए।
विज्ञापन

मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट रजनीश मिश्र ने माना कि पुलिस की ओर हुई कार्रवाई गलत है। शिक्षकों को बिना शर्त रिहा कर दिया गया। सिटी मजिस्ट्रेट ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वह धरने के लिए राज्य विश्वविद्यालय की कुलपति और जिलाधिकारी के यहां आवेदन कर दें। वह खुद डीएम से बात करेंगे। शिक्षकों ने तय किया कि सोमवार को वह धरने के लिए अनुमति मांगेंगे। अगर इसके बाद भी आनाकानी की गई तो शिक्षक आमरण अनशन शुरू कर देंगे। इस दौरान डॉ. रविंद्र नाथ सिंह, ओपी गुप्ता, विजय गुप्ता, अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव, सुनील चौधरी, पंकज शुक्ला, अवनीश त्रिपाठी, रोशन जहां सिद्दीकी, ख्वाजा नौसार, नूर अहमद, बादशाह निजमीन, पंकज सिंह आदि मौजूद रहे।
शिक्षकों के समर्थन में सीएम को किया ट्विट
- युवा मंच के संयोजक राजेश सचान ने भी शिक्षकों के समर्थन में मुख्यमंत्री को ट्विट किया और कहा कि 29 अगस्त को कलक्ट्रेट में युवा मंच की ओर से प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में स्ववित्त पोषित शिक्षकों का मुद्दा भी उठोगा।
आठ से दस हजार में पढ़ा रहे शिक्षक
प्रयागराज। एक तरफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय और उसके संघटक कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात शिक्षकों को 70 से 80 हजार रुपये वेतन मिल रहा है, वहीं स्ववित्त पोषित कॉलेजों के शिक्षकों को आठ से दस हजार रुपये के वेतन पर पढ़ाना पड़ रहा है। स्ववित्त पोषित कॉलेजों के शिक्षक इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।
शिक्षकों का कहना है कि यूजीसी के निर्देशों के अनुसार स्ववित्त पोषित बीएड कॉलेजों में शिक्षक को न्यूनतम 34 हजार 400 रुपये वेतन मिलना चाहिए, लेकिन किसी भी कॉलेज में इतना वेतन नहीं मिल रहा और 90 फीसदी कॉलेजों में तो महज आठ से दस हजार रुपये प्रति माह वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं। सिर्फ बीएड नहीं, सभी पाठ्यक्रमों में यही स्थिति है। ज्यादातर स्ववित्त पोषित कॉलेजों में कागज में तो नेट-जेआरएफ और पीएचडी वाले शिक्षक पढ़ा रहे हैं, लेकिन मौके पर स्थिति अलग है। अगर किसी शिक्षक ने मुंह खोला तो उसकी नौकरी जानी तय है। सिर्फ शिक्षक ही नहीं, प्राचार्यों को भी 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर पढ़ाना पड़ रहा है।
विज्ञापन

स्ववित्त पोषित कॉलेजों के शिक्षकों का दावा है कि कॉलेज प्रबंधन छात्र-छात्राओं के शुल्क से होने वाली आय का महज 10 से 15 फीसदी हिस्सा ही उनके वेतन पर खर्च कर रहा है, जबकि नियम है कि कॉलेज प्रबंधन 80 फीसदी हिस्सा वेतन के मद में खर्च करेंगे। इस नियम को सख्ती से पालन कराया जाए और किस कॉलेज में कितने शिक्षक पढ़ा रहे हैं, इसकी जमीनी हकीकत जाने के लिए जांच करा ली जाए, शिक्षकों की सिर्फ यही मांग है और इस मसले पर वह 14 दिनों से राज्य विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें लिखित आश्वासन देने को तैयार नहीं हुआ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें