पुलिस ने पूर्व सपा विधायक खालिद अजीम को गिरफ्तार किया
- फोटो : अमर उजाला
25 जनवरी 2005, यही वह तारीख है जिसने अशरफ और अतीक को बर्बाद कर डाला। यही वह दिन था जब सुलेमसराय में अत्याधुनिक हथियारों से लैस शूटरों ने तत्कालीन विधायक राजू पाल को गोलियों से भून दिया था। इसके बाद से ही अतीक और अशरफ के दुर्दिन शुरू हो गए। ज्यादातर समय वह फरार रहा। 2012 में सपा सरकार बनने के बाद अशरफ वापस आया लेकिन इस बार पुरानी हैसियत खत्म हो गई थी।
राजू पाल हत्याकांड के बाद अशरफ को जेल भेज दिया गया था। हालांकि वह जल्द ही छूट गया था। 2007 में जैसे ही बसपा सरकार बनी अतीक और अशरफ दोनों फरार हो गए थे। पुलिस ने अतीक को तो दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया था लेकिन अशरफ 2011 में पकड़ा गया था।
लगभग चार साल वह फरार रहा। इसके बाद सपा सरकार बनने के बाद वह फिर जेल से छूटा। 2017 में जैसे ही भाजपा सरकार बनी अशरफ फिर फरार हो गया था। तीन साल तक उसने फरारी काटी। शुक्रवार को उसे गिरफ्तार किया गया।
अशरफ के मोबाइल की तलाश, मिलेंगे मददगारों के नाम
पुलिस ने गिरफ्तारी के समय अशरफ के पास से जो पिस्टल, फार्च्यूनर और रुपये आदि बरामदगी दिखाई है लेकिन उसका मोबाइल पुलिस नहीं ढूंढ पाई। यह बात भी हो सकती है कि पुलिस ने जानबूझकर उसके मोबाइल की बरामदगी न की हो।
उसके मोबाइल से ही पता चलेगा कि फरारी के दौरान वह किनके संपर्क में रहता था। मददगारों में कौन कौन शख्स शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जहां से गिरफ्तारी हुई है, हो सकता है कि वहीं किसी ने उसका मोबाइल छुपा दिया हो। मोबाइल की बरामदगी का प्रयास किया जा रहा है।