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आशा भर्ती मामला: डीसीपीएम ने जांच में कबूला, भूलवश बिना डीएम के अनुमोदन के हो गई भर्ती प्रक्रिया

Sun, 22 Dec 2024 05:41 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ग्रामीण क्षेत्रों में पांच हजार की आबादी पर एक स्वास्थ्य उपकेंद्र होते हैं। इसमें एक हजार की आबादी पर एक आशा कार्यकर्ता का चयन होता है। चयन प्रक्रिया के लिए जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी से अनुमोदन लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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आशा बहू भर्ती। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आशा भर्ती मामले में आरोपी डीसीपीएम (डिस्ट्रिक कम्युनिटी प्रोसेज मैनेजर) अशफाक अहमद ने जांच समिति के सामने दिए गए, बयान में इस बात को स्वीकार किया है, कि भूलवश बिना जिलाधिकारी के अनुमोदन के प्रयागराज के पूर्व एसीएमओ व वर्तमान में संभल के सीएमओ डॉ. तरुण पाठक के साथ 448 आशाओं की मनमानी नियुक्ति की गई थी। जिसके बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हलचल पैदा हो गई है। हालांकि अभी इस मामले में जांच चल रही है।

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बता दें कि अक्टूबर महीने में अमर उजाला ने इस मुद्देे को उठाया था। जिसमें 2023 में बिना डीएम के अनुमोदन के आशा के 467 में 448 पदों पर नियुक्ति डीसीपीएम अशफाक अहमद और पूर्व एसीएमओ व नियुक्ति के नोडल डॉ. तरुण पाठक ने का दी थी।वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रमुख सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन के अपर निदेशक धीरेंद्र सिंह को पत्र लिखकर जांच कराने को कहा, जिसपर प्रयागराज के जिलाधिकारी ने मामले की जांच शुरू करा दी है।

इसी कड़ी में बिना गाइडलाइन का पालन किए और जिलाधिकारी के बगैर अनुमोदन के ही नियुक्त मामले में डीसीपीएम अशफाक ने जांच समिति को दिए गए अपने लिखित जवाब में कहा है, कि भूलवश तत्कालीन नोडल अधिकारी एसीएमओ ने आशा नियुक्ति के पहले जिला स्वास्थ्य समिति से यानी जिलाधिकारी से अनुमोदन नहीं लिया था। वहीं जल्द ही इस मामले में डॉ. तरूण पाठक से भी जवाब लिया जाएगा।

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दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों में पांच हजार की आबादी पर एक स्वास्थ्य उपकेंद्र होते हैं। इसमें एक हजार की आबादी पर एक आशा कार्यकर्ता का चयन होता है। चयन प्रक्रिया के लिए जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी से अनुमोदन लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिस गांव में चयन होना है, वहां खुली बैठक आयोजित होती है। बैठक में ग्राम प्रधान, एएनएम और सेक्रेटरी शामिल होते हैं, इसमें उसी गांव की अभ्यर्थी से आवेदन लिया जाता है। यह दोनों प्रक्रिया नहीं कराई गई। चयन कर तीनों आवेदन संबंधित सीएचसी के अधीक्षक व बीसीपीएम के पास भेजे गए। वहीं कीडगंज निवासी बलराम पांडेय की ओर से मुख्यमंत्री के यहां इसकी शिकायत की गई थी।

जल्दबाजी में हुई ट्रेनिंग

वहीं तत्कालीन एसीएमओ डॉ. तरूण पाठक व डीसीपीएम अशफाक अहमद की ओर से आनन-फानन बिना बजट मिले ही इन आशाओं की आठ दिवसीय ट्रेनिंग भी करा दी। ताकि बाद में इसमें कोई सवाल न उठे।

अभी आशा भर्ती मामले की जांच चल रही है, इसलिए इस संबंध में कुछ भी कहना सही नहीं होगा, जांच के बाद ही क्या सही है, सामने आएगा। - डॉ. एके तिवारी, सीएमओ। 

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