आरोपी खुद को बताता था ऊर्जा मंत्री का खास
श्यामेंद्र बिजली विभाग में ठेकेदारी करता था। उसने पूछताछ में बताया कि वह खुद को तत्कालीन ऊर्जा मंत्री का खास बताता था। कई बार अपनी पैरवी में उसने ऊर्जा मंत्री बनकर बिजली विभाग के अफसरों को फोन भी किया था। यही वजह थी कि स्थानीय अधिकारियों के बीच उसकी अच्छी पैठ थी।
...तो एसओ को झांसा देकर दर्ज कराई एफआईआर?
मेजा थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह के पास भी आरोपियों ने फोन किया था। पुलिस का एक बड़ा अधिकारी बनकर मारपीट के मामले में आरोपियों पर कार्रवाई को कहा था। इस मामले में श्यामेंद्र की तहरीर पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी। चर्चा है कि यह एफआईआर भी आरोपियों ने पुलिस के एक बड़े अफसर का नंबर हैक कर कराई थी। अफसर बनकर थानेदार के पास फोन किया, जिसके बाद रिपोर्ट दर्ज हुई। हालांकि एसओ इससे इंकार करते रहे। उनका कहना है कि आरोपी के बेटे से मारपीट हुई थी और जांच पड़ताल के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई थी।
बाबुओं की की थी सिफारिश
चर्चा यह भी है कि इन हैकरों ने तहसील में भी अपना जाल बिछाया गया था। इन्होंने कई लेखपालों के स्थानांतरण की भी सिफारिश की थी। इसके अलावा मेजा तहसील के कई बाबू इन्हीं की बदौलत आठ-10 सालों से भी ज्यादा समय से मेजा तहसील में ही डटे हैं।
यूट्यूब से सीखा एप का इस्तेमाल
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि उन्होंने एप प्लेस्टोर से डाउनलोड किया। साथ ही यूट्यूब से इसे इस्तेमाल करने का तरीका सीखा।