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Prayagraj: शंकराचार्य के माघ मेला छोड़कर जाते ही शिष्यों ने खाली किया शिविर, काशी के लिए हुए रवाना

Wed, 28 Jan 2026 09:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के माघ मेला छोड़कर काशी जाने के बाद अब उनका शिविर भी शिष्यों ने बुधवार को ही खाली कर दिया।
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माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में लगे सीसीटीवी को उतारते भक्त। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के माघ मेला छोड़कर काशी जाने के बाद अब उनका शिविर भी शिष्यों ने बुधवार को ही खाली कर दिया। शिविर में रहने वाले शंकराचार्य के भक्त और शिष्य भी शिविर खाली कर आज ही काशी के लिए रवाना हो गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के मुताबिक शंकराचार्य जी ने भारी मन से बगैर गंगा स्नान किए माघ मेले को छोड़ा है। उन्होंने प्रशासन पर सुविधाओं का प्रलोभन देकर टेक छोड़ने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है।

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टेक रहेगी जारी, अगली बार माघ मेला आएंगे तो शिविर के बाहर पालकी पर ही विराजेंगे
स्वामी मुकुंदानंद ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने टेक नहीं छोड़ा है, उन्होंने मेला छोड़ने का फैसला लिया। उनके मुताबिक उनके गुरु का प्रण है कि उनकी टेक महीनों, वर्षों नहीं बल्कि सदियों और पीढ़ियों तक जारी रहेगी। जब तक कि मेला प्रशासन ससम्मान उन्हें गंगा स्नान नहीं करता है। उन्होंने कहा है कि अगले साल फिर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब माघ मेले में आएंगे तब भी वह शिविर के बाहर ही पालकी पर विराजमान रहेंगे।



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देश भर के साधु-संत 10 और 11 मार्च को दिल्ली में जुटेंगे
स्वामी मुकुंदानंद के मुताबिक, देश के साधु संत आगामी 10 और 11 मार्च को दिल्ली में जुटेंगे। जहां गोहत्या बंद करने के लिए साधु-संत चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा है कि माघ मेले में हुई घटना पर भी चर्चा की जाएगी। हालांकि इस दौरान सभी चारों शंकराचार्य एक मंच पर होंगे कि नहीं इस सवाल पर कहा है कि अगर एक शंकराचार्य भी वहां मौजूद रहेंगे तो वह उनके प्रतिनिधि के रूप में ही काम करेंगे। उन्होंने कहा है कि इस बार माघ मेले में शिविर में सवा लाख शिवलिंग के दर्शन श्रद्धालुओं को कराने का लक्ष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने रखा था लेकिन मौनी अमावस्या को हुए विवाद के बाद यह कार्य भी पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा है कि शंकराचार्य के माघ मेला छोड़ने के बाद अब शिवलिंग भी वह लोग वापस लेकर जा रहे हैं।
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