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बुंदेलखंड जैसा पैकेज, फिर भी केरोसिन कोटे में कटौती

Sun, 08 May 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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पेट्रोल पंप - फोटो : अमर उजाला
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कुछ दिनों पहले इलाहाबाद आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सूखे की मार झेल रहे यमुनापार को बुंदेलखंड जैसा राहत पैकेज देने की घोषणा की। इसके लिए जिला प्रशासन ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भी भेज दिया। पैकेज का तो अतापता नहीं लेकिन इलाहाबाद को मिलने वाले केरोसिन ऑयल(मिट्टी का तेल) के कोटे में कटौती जरूर कर दी गई। यमुनापार को बुंदेलखंड जैसा पैकेज मिलने की घोषणा के बाद जब इलाहाबाद को केरोसिन ऑयल का अतिरिक्त कोटा मिलना चाहिए था, उस वक्त कोटे में कटौती समझ से परे है। फिलहाल चर्चा यही है कि बुंदेलखंड को अतिरिक्त कोटा देेने के लिए इलाहाबाद सहित अन्य जिलों के कोटे में भी कटौती की गई है।
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इलाहाबाद को पिछली बार 3980 किलो लीटर यानी 39 लाख 80 हजार लीटर केरोसिन ऑयल आवंटित हुआ था। इस बार आवंटित कोटे में तकरीबन 300 किलो लीटर (तीन लाख लीटर) की कटौती की गई है। ऐसे में केरोसिन वितरण को लेकर जबर्दस्त संकट खड़ा हो सकता है। दरअसल, नया सर्वे होने के बाद कार्डधारकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में वितरण का संकट पहले ही उत्पन्न हो चुका है।   सर्वे से पहले प्रति कार्ड दो से तीन लीटर केरोसिन ऑयल दिया जाता था। कार्डधारकों की संख्या बढ़ी लेकिन कोटा नहीं, सो प्रति कार्डधारक के हिस्से डेढ़ से ढाई लीटर केरोसिन ऑयल आने लगा। अब जिले के कोटे में तीन लाख लीटर की कटौती हो जाने से केरोसिन ऑयल की उपलब्धता काफी कम हो जाएगी जबकि यमुनापार को बुंदेलखंड जैसा राहत पैकेज दिए जाने के बाद कोटे में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। अफसरों का कहना है कि कोटे में कटौती का आदेश आया है, लेकिन वजह स्पष्ट नहीं की गई है। माना जा रहा है कि सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड को अतिरिक्त सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से इलाहाबाद सहित अन्य जिलों का कोटा कम किया गया है।
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शहरी क्षेत्र मेें भले ही 80 से 90 फीसदी आबादी रसोई गैस का इस्तेमाल कर रही हो लेकिन ग्रामीण इलाकों में आंकड़ा बिल्कुल विपरीत है। वहां तकरीबन 80 फीसदी आबादी केरोसिन ऑयल पर ही निर्भर है। भोजन पकाने से लेकर लाइट के विकल्प तक ग्रामीण इसका उपयोग करते हैं। गांवों में वैसे भी बिजली की जबर्दस्त किल्लत है। कई गांवों में तो बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। कोटे की दुकानों में केरोसिन ऑयल 16.50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है।

सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में बिकने वाले केरोसिन ऑयल की कालाबाजारी रोकने के लिए जल्द ही बाजार में सफेद केरोसिन ऑयल की बिक्री शुरू कर दी जाएगी। यूपी में इलाहाबाद सहित 16 जिलों में सफेद केरोसिन ऑयल खुले बाजार में मिलेगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को अपनी अनुमति दे दी है। ऑयल कंपनियां सफेद केरोसिन ऑयल की बिक्री थोक विक्रेताओं के माध्यम से करेंगी। ऑयल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा। वर्तमान में इसका बाजार मूल्य 60 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। 
यूपी में 12 साल पहले खुले बाजार में सफेद केरोसिन ऑयल की बिक्री की जाती थी लेकिन बाद में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया और सिर्फ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत नीले रंग के केरोसिन ऑयल की बिक्री का निर्णय लिया गया। केरोसिन ऑयल का रंग नीला इसलिए रखा गया ताकि खुले बाजार में कालाबाजारी के दौरान इसे आसानी से चिह्नित किया जा सके। हालांकि इसके बावजूद सब्सिडी वाले नीले केरोसिन ऑयल की खुले बाजार में कालाबाजारी जारी है। अब केंद्र सरकार ने यूपी में इलाहाबाद सहित 16 जिलों में सफेद केरोसिन ऑयल की बिक्री की अनुमति दे दी है।   वर्तमान में नीले रंग के सब्सिडी वाले केरोसिन ऑयल कार्डधारकों को 16.50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दिया जा रहा है जबकि बाजार में यह 40 रुपये प्रति लीटर की दर पर बेचा जा रहा है। कालाबाजारी में दोगुना से अधिक मुनाफा होने के कारण कोटेदार से लेकर अफसरों तक की जेब गर्म हो रही है जबकि इस पर नियंत्रण करना आसान है। इसके लिए किसी जांच की जरूरत नहीं। सिर्फ रंग देखकर इसकी कालाबाजारी की पुष्टि की जा सकती है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

‘इलाहाबाद के कोटे में 300 केएल केरोसिन ऑयल की कटौती की गई लेकिन कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। जहां तक यमुनापार की बात है तो वहां राहत पैकेज के लिए भेजे गए प्रस्ताव में सभी जरूरतों को उल्लेख किया गया है। राहत पैकेज जारी होने पर केरोसिन ऑयल की कमी दूर होने की पूरी उम्मीद है।’ प्रेम प्रकाश पाल, एडीएम आपूर्ति
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